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अस्पतालों के सामने कचरा कलेक्शन सेंटर, 10 हजार से अधिक मरीज जूझते हैं संक्रमण से

स्वच्छ सर्वे की रैंकिंग में लुढकऩे के बाद भी निगम के जिम्मेदार नहीं हटा रहे शहर के बीच की कचरा खंतियां

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अस्पतालों के सामने कचरा कलेक्शन सेंटर, 10 हजार से अधिक मरीज जूझते हैं संक्रमण से

भोपाल. करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी भोपाल स्वच्छ सर्वे की रैंकिंग में दूसरे पायदान से लुढकक़र 19वें पर आ गया है। इसके बाद भी नगर निगम के जिम्मेदार लापरवाही से बाज नहीं आ रहे हैं। शहर में घनी आबादी वाले क्षेत्रों में 12 से अधिक कचरा कलेक्शन सेंटर बना रखे हैं। इनमें से कुछ तो एम्स, सुल्तानिया अस्पताल, इंदिरा गांधी अस्पताल, पल्मोनरी अस्पताल के आसपास संक्रमण फैला रहे हैं। इसके अलावा 12 निजी अस्पतालों के आसपास भी कचरा डंपिंग यार्ड हैं। इन सभी अस्पतालों में रोजाना दस हजार से अधिक मरीज पहुंचते हैं, जो इस कचरे की वजह से गंभीर संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के मुताबिक अस्पताल परिसर के 500 मीटर इलाके में किसी भी प्रकार का संक्रमण नहीं होना चाहिए। अस्पताल के आसपास छोटी बड़ी फैक्ट्रियां, कचरा डंपिंग यार्ड, स्लॉटर हाउस या कचरा जलाने जैसी गतिविधियां निषेध हैं।

यहां हंै नगर निगम के कचरा कलेक्शन सेंटर
टीटी नगर दशहरा मैदान के पास, यादगार-ए-शाहजहानी पार्क के पीछे खेल मैदान, यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के पास, बरखेड़ा पठानी, आनंद नगर और सीहोर नाका सहित 14 जगह अस्थाई कचरा खंतियां हैं।
600 मीट्रिक टन कचरा जलाया जा रहा रोजाना
शहर में रोजाना करीब 850 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। निगम इसमें से महज 250 मीट्रिक टन कचरा ही उठाता है। बाकी 600 मीट्रिक टन कचरा सडक़ों, गली-मोहल्लों के साथ ही अस्थाई कचरा खंतियों में डंप रहता है। खंतियों में जैसे ही कचरा बढ़ता है, निगम कर्मचारी आग लगा देते हैं, ताकि वह कम हो जाए।
संक्रमण से फेफ ड़़ों का सबसे ज्यादा नुकसान
श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएन अग्रवाल के मुताबिक कचरा जलाने से कार्बन डाई ऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं। हवा में पार्टिकुलेट मैटर (जहरीले कण) की मात्रा बढ़ जाती है, जो फेफ ड़ों को नुकसान पहुंचाता है। नवजात और गर्भवती महिलाओं के लिए यह ज्यादा घातक है।
नहीं होती सुनवाई
सुल्तानिया अस्पताल प्रशासन कई बार खंती के खिलाफ नगर निगम में शिकायत कर चुका है। अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. करण पीपरे ने बताया कि उन्होंने दो बार निगम को शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।


मैं खुद मौके पर जाकर देखूंगा। अधिकारियों के साथ बैठक भी की जाएगी। इन सेंटरों को साफ करवाया जाएगा।
आलोक शर्मा, महापौर