भोपाल। वास्तु सकारात्मक ऊर्जा के बैलेंस को बनाएं रखने में कारगर है। अशुभ परिणामों से बचने के लिए वास्तु की मदद ली जा सकती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तु हर छोटी-बड़ी चीज में बसा है। जैसे अर्श तक पहुंचने की शुरूआत जमीन से होती है वैसे ही नकारात्मक तत्वों को काटने की शुरूआत फर्श से होती है। वास्तु एक्सपर्ट अमित मुखर्जी बता रहे हैं फर्श के जरिए अर्श तक पहुंचने का वास्तु मार्ग...
नैऋत्य कोण
इस दिशा में कोई भी गढ्ढा होना सबसे बड़ा वास्तु दोष होता है। घर के यदि दक्षिण-पश्चिम भाग में यदि फर्श चमकीले है तो यह भी वास्तु दोष माना जाता है क्योंकि यह गहराई बनाता है जो कि अंडरग्राउंड की स्थिति होती है यह नुकसानदायक है। यहां तुरंत दरी या चटाई आदि बिछा के इसे ढक दें इससे धरती का कोप शांत हो जायगा।
दक्षिण-पूर्व
इस क्षेत्र में यदि फर्श चमकीला है तब फर्श की गहराई को दिखाता है जिससे हमें अग्नि सम्बंधित परेशानियाँ और कार दुर्घटना, आग लगना, कर्ज चढऩा, करंट लगना बीमारी आदि कुछ भी होने की संभावना होती है.उसे भी ढक कर रख दे।
उत्तर-पूर्व
इस दिशा में गहराई अच्छी मानी जाती है। उत्तर-पूर्व कि कोण अर्थात ईशान कोण में चमकीला फर्श अत्यंत लाभदायक होता है। ईशान भाग में हमेशा चमकीले फर्श और शीशे लाभदायी होता है। नार्थ-ईस्ट में फव्वारा भी बहुत उत्तम होता है।
उत्तर-पश्चिम
इस दिशा में चमकीला फर्श मित्र को भी शत्रु बनाता है। कोर्ट कचहरी के चक्कर लगवाता है। तलाक की संभावना होती है। इस दिशा को भी चमकीला ना बनवाएं। इसे ढक कर आपदाओं से बचा जा सकता है। पश्चिम हिस्से के फर्श पर चमकीला फर्श घर के बेटो को नुकसान देगा उनकी उन्नति में यहाँ का फर्श बाधा कारक होता है।
पूर्व दिशा और उत्तर दिशा
इस तरफ लगे हुए चमकीले फर्श इस भाग को गरम करते है जिसके कारण आपके लाभ होगा धन का आगमन तीव्र गति से होता है तथा घर / भवन में शान्ति की स्थापना होती है। बरकत भी बढ़ती है। घर के सभी सदस्य संपन्न होने लगते है। उत्तर पूर्व दिशा में फर्श से छत तक का दर्पण कई गुणा लाभ देता है।