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3 रुपए में बैक्टीरिया फ्री और ताजा रहेंगी सब्जियां

सब्जियों के पोषक तत्व भी कम नहीं होंगे.

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3 रुपए किलो में 12 दिन तक बैक्टीरिया फ्री और ताजा रहेंगी सब्जियां

3 रुपए किलो में 12 दिन तक बैक्टीरिया फ्री और ताजा रहेंगी सब्जियां

मनीष कुशवाह
भोपाल. सब्जियों को तोडऩे के बाद ताजा बनाए रखने और उसे बैक्टीरिया फ्री बनाए रखने के लिए एक आधुनिक मशीन डेवलप की है, जिससे हरी, ताजा कटी हुई सब्जियों को करीब दो सप्ताह तक ताजा रखा जा सकेगा, इससे सब्जियों के पोषक तत्व भी कम नहीं होंगे, फायदे की बात तो यह है कि इसकी लागत भी महज 3 रुपए किलो आएगी।

सब्जियों-फलों की तुड़ाई के बाद इनके खराब होने का खतरा रहता है। ऐसे में भोपाल के नबीबाग स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान ने ऐसी मशीन विकसित की है जो ताजी कटी सब्जियों और फलों को बैक्टीरिया मुक्त करेगी। पैकेजिंग और 12 दिन तक उपयोग के लायक बनाएगी।


7 लाख रुपए लागत
सब्जियों और फलों को अधिक दिन तक सुरक्षित बनाए रखने के लिए इन्हें काटकर और पैक कर बाजारों में उपलब्ध कराया जाता है। इसका चलन तेजी से बढ़ा है। मॉल्स समेत सब्जी-फल विके्रताओं ने भी बैक्टीरिया मुक्त पैक्ड सब्जियों और फलों की बिक्री शुरू की है। संस्थान द्वारा तैयार की गई यूनिट की लागत तकरीबन सात लाख रुपए बताई जा रही है। ये यूनिट किसानों, सब्जी विक्रेताओं, खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित उद्योगों के लिए तैयार की गई है। इस यूनिट के संचालन के लिए प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किए गए हें।

कटे हुए उत्पाद की खराब होने की आशंका ज्यादा
संस्थान के निदेशक डॉ. सीआर मेहता के मुताबिक कटे हुए उत्पादों की मियाद (सेल्फ लाइफ) बढ़ाना चुनौती रहती है। कई कारक हैं जो गुणवत्ता और सेल्फ लाइफ को सीमित करते हैं। ऐसे में पूरे फल-सब्जियों की तुलना में कटे हुए उत्पाद की खराब होने की आशंका ज्यादा रहती है। इसके लिए संस्थान के वैज्ञानिकों ने इस यूनिट को तैयार किया है।

यह खासियत
प्रति घंटे 100 किलोग्राम तक कटी हुई सब्जियों-फलों का उत्पादन।
इसमें एक वॉशर (बबल टाइप), कटर, ओजोन ट्रीटमेंट सिस्टम, यूवी चैंबर और पैकेजिंग मशीन है।
सब्जियों की धुलाई और कटाई के बाद उसे ओजोन ट्रीटमेंट सिस्टम और क्लोरीनयुक्त पानी से उपचारित किया जाता है।
सतह से नमी दूर करने अल्ट्रावायलेट तकनीक की मदद ली जाती है। ओजोन और यूवी तकनीक के उपयोग से सब्जियों के रंग में परिवर्तन नहीं आता।


खाद्य पदार्थों का अपशिष्ट बनेगा बैक्टीरिया का भोजन
सोयाबीन से हाईप्रोटीन दूध, पनीर, बटर, चीज समेत अन्य खाद्य उत्पाद बनाने के बाद बचे अपशिष्ट पदार्थ से मानव स्वास्थ्य के लिए उपयोगी बैक्टीरिया को पोषण देने जरूरी कल्चर मीडिया (भोजन) तैयार किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के वैज्ञानिक काम कर रहे हैं।

हानिकारक बैक्टीरिया को पनपने से रोकने में आसानी
अभी तक की रिसर्च में सोया प्रोडक्ट तैयार करने के बाद बचे तरल और सब्जी-फल के अपशिष्ट पदार्थों से मीडिया कल्चर पावडर फार्म में बनाया गया है। इसका उपयोग फर्मेंटेशन (किण्वन) यानी दही जमाने या अचार समेत खमीर संबंधित खाद्य पदार्थों के लिए किया जाता है। माइक्रोबायोलॉजी लैब में किए जाने वाले प्रयोगों में भी इसका उपयोग होता है। वर्तमान में मीडिया कल्चर का निर्माण लैब में सिंथेटिक तरीके से होता है। अपशिष्ट पदार्थों के बेहतर मैनेजमेंट से पर्यावरण प्रदूषण के साथ ही मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक बैक्टीरिया को पनपने से रोकने में आसानी होगी।

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प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. एमके त्रिपाठी के मुताबिक सोया उत्पाद अनुसंधान केंद्र द्वारा तैयार किए गए सोया चीज स्प्रेड को पेटेंट कराने की प्रक्रिया जारी है। इसी तरह कल्चर मीडिया के निर्माण की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में हैं।

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आधे होंगे दाम
बाजार में लैब में बना कल्चर मीडिया की कीमत प्रति 500 ग्राम तकरीबन 500 से 600 रुपए है, जबकि अपशिष्ट पदार्थ से बने कल्चर मीडिया के दाम इससे आधे होंगे।