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हुई महंगी बहुत ही शराब, 11 ग्रुप के टेंडर से 318 करोड़ मिले

नीलामी में आबकारी विभाग ने भोपाल के 33 ग्रुप के लिए 1057 करोड़ का रिजर्व प्राइस रखा है।

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liquor shops auction : शराब के 102 समूह 36% अधिक दामों पर नीलाम, जानिये शेष दुकानों की कब होगी नीलामी

liquor shops auction : शराब के 102 समूह 36% अधिक दामों पर नीलाम, जानिये शेष दुकानों की कब होगी नीलामी

भोपाल. वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए राजधानी की 92 शराब दुकानों के लिए शुक्रवार दोपहर दो बजे से कलेक्टोरेट में ऑनलाइन बोली लगाई गई। नीलामी में आबकारी विभाग ने भोपाल के 33 ग्रुप के लिए 1057 करोड़ का रिजर्व प्राइस रखा है। जिसमें से 33 में से 11 ग्रुप के टेंडर आए जो पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार 41 करोड़ ज्यादा रैवेन्यू से उठे हैं। चालू वित्त वर्ष में 780 करोड़ में सिंगल ग्रुप को ठेके दिये गये थे। लेकिन इस बार ये रकम और बढ़ गई है।

नई आबकारी नीति के तहत आगामी वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए किये जा रहे टेंडर में ठेकेदारों की नजर में करोद, पिपलानी, हबीबगंज फाटक के लिए बड़ी बोली लगी। पिछले वर्ष इन 11 ग्रुप के टेंडर 277 करोड़ के थे जो इस बार 318 करोड़ के पहुंच गए। पिछले वर्ष से 41 करोड़ ज्यादा हैं। अभी भोपाल में 22 ग्रुप की बोली लगना बाकी है। आबकारी अधिकारियों की मानें तो जल्द ही इसकी डेट आ जाएगी।

भोपाल जिले में इस बार छोटे-छोटे ग्रुपों में शराब दुकानों की बोली लगाई गई है। बावजूद इसके ठेकेदारों ने रूचि नहीं दिखाई। शहर की 92 शराब दुकानों में मात्र 32 को लेने के लिए कारोबारी आगे आये। इसमें भी सिर्फ छोटे ग्रुप की दुकानों को लेने की होड़ ठेकेदारों में दिखी। शासन ने 33 ग्रुप की 92 दुकानों के लिए 1057 करोड़ रुपए आरक्षित मूल्य तय किया है। शुक्रवार को इसमें से मात्र 280 करोड़ का राजस्व ही शासन को प्राप्त हो सका। यह टोटल रिजर्व प्राइस का 26 फीसदी है, जो उम्मीद से काफी कम रहा। आगे होने वाली बोली में भी अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद नहीं है। इससे साफ है कि राजधानी में नीलामी को लेकर खास तैयारी नहीं की गई थी। शेष रह गई दुकानों की फिर से बोली लगाई जाएगी। इसके लिए शासन द्वारा नई तारीख घोषित की जाएगी।

कोलार, एमपी नगर और अरेरा ग्रुप के लिए नहीं मिले ठेकेदार
विभाग द्वारा उम्मीद जताई जा रही थी कि छोटे ग्रुप में हो रहे टेंडर में ठेकेदार बड़े ग्रुप कोलार, एमपी नगर, अरेरा, हबीबगंज नाका, पिपलानी और करोंद को लेने में रूचि दिखाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सिर्फ पिपलानी और करोंद को छोड़ दे तो अन्य बड़े ग्रुप के लिए ठेकेदारों ने बोली ही नहीं लगाई। अधिकांश छोटे ग्रुप के लिए ही बोली लगाई गई।