
यहां से बगावती सुर सुन रही है भाजपा! जीत की तैयारियों में फिर पुरानी वाली स्थिति रोड़ा...
भोपाल। लोकसभा चुनावों को लेकर सभी पार्टियां अपनी तैयारियों में जुटी हुई हैं, जहां एक ओर कांग्रेस अब तक अपनी 6 लिस्ट जारी कर चुकी है, वहीं भाजपा ने अभी केवल एक ही सूची जारी की है।
दरअसल जानकारों की मानें तो तैयारी के बीच भाजपा की नाव मध्यप्रदेश में कुछ अटक सी गई है। इसी के चलते भाजपा की ओर से जारी 184 सीटों में कहीं भी मध्यप्रदेश की किसी एक सीट तक का खुलासा नहीं किया गया।
वहीं आने वाली दूसरी लिस्ट में मध्यप्रदेश की कुछ सीटों के प्रत्याशियों के खुलासे का अनुमान लगाया जा रहा है। जबकि कई सीटों के प्रत्याशियों को अभी इस दूसरी सूची में भी जगह मिलने की आशा कम ही दिख रही है।
दरअसल मध्यप्रदेश में भाजपा के कुछ प्रमुख किलों या यूं कहें गढ़ों को लेकर असमंजस बरकरार है। वहीं इनमें किसी भी पल बगावत का बादल भी मंडरा रहे हैं।
ये है स्थिति...
दरअसल विधानसभा चुनावों के समय भी मध्यप्रदेश ने ही भाजपा के लिए सबसे कठिन स्थितियों को पैदा किया था। जानकार मानते हैं कि उस समय तीन राज्यों में हुए चुनाव में जहां राजस्थान को लेकर भाजपा हर बार सरकार बदलने की स्थिति को लेकर काफी हद तक अपनी सरकार को जाता हुआ देख रही थी।
वहीं छत्तीसगढ़ को लेकर भाजपा काफी आश्वस्त थी, लेकिन वहां भी मिली शिक्सत का असर इस लोकसभा चुनावों में प्रत्याशियों की स्थिति पर पूरा असर डालता हुआ दिख ही गया।
इस समय भी मध्यप्रदेश ऐसा राज्य था जिसे लेकर भाजपा में तक संशय की स्थिति बनी हुई थी- जीत हार के इस संशय के बीच पार्टी काफी मजबूत तो रही, लेकिन सरकार नहीं बना सकी। उस दौरान भी भाजपा में बगावत के चलते ही कई सीटों पर हार का सामना किया।
ऐसे में अब एक बार फिर कुछ वहीं स्थिति पैदा होने के चलते भाजपा किसी भी स्थिति में मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनावों के दौरान वहीं गलती दोहराना नहीं चाहती। इसी के चलते सूत्रों के अनुसार कई सीटों पर जहां एक ओर लोगों से बातें कर उन्हें समझाया जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर परेशानी में आए भोपाल और विदिशा जैसे अपने किलों को बचाने के लिए बगावत पर उतर रहे साथियों को साथ लेने का प्रयास किया जा रहा है।
ऐसे फंसी भोपाल और विदिशा की सीट...
दरअसल ये दोनों ही सीटें भाजपा का किला कहलाती है, जहां करीब 3 दशकों से भाजपा का ही कब्जा है। वहीं भोपाल में जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता जैसे बाबूलाल गौर इस सीट से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, वहीं इस सीट के लिए वर्तमान सांसद आलोक संजर, मेयर आलोक शर्मा और पूर्व मंत्री उमा शंकर गुप्ता भी दावा ठोक रहे थे।
लेकिन इन सब के बीच अचानक पेनल में नाम वीडी शर्मा का आ जाने से अचानक भाजपा में नाराजगी फैल गई और एक बार फिर कमोबेश स्थिति विधानसभा चुनाव वाली जैसी ही निर्मित होती दिख रही है। ऐसे में भाजपा आलाकमान तक इस सीट को लेकर सकते में बताए जाते हैं।
जबकि दूसरी ओर विदिशा से सुषमा स्वराज के चुनाव से इंकार कर दिए जाने से भी यहां कि स्थिति गड़बड़ानी शुरू हो गई है। इस सीट को लेकर जहां पूर्व सीएम शिवराज की पत्नी साधना सिंह का नाम समाने आ रहा था। वहीं उन्हें लेकर शिवराज के रिश्तेदार ही विरोध में आ गए हैं। उन्होंने यहां से शिवराज का चुनाव लड़ने की बात कहते हुए कहा है कि यदि उनकी जगह साधना सिंह चुनाव लड़ाया जाएगा तो वे तक श्रीमती सिंह के विरुद्ध चुनाव में उतर जाएंगे।
वहीं समाने आ रही जानकारी के अनुसार भाजपा का ही एक तबका शिवराज को यहां से चुनाव लड़ानेे के हक में नहीं है और उसका मानना है कि शिवराज किसी कठिन सीट से चुनाव लड़ें, क्योंकि शिवराज मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बड़ा नाम होने के साथ ही जीत की गारंटी भी माने जाते हैं।
राजनीति के जानकार डीके शर्मा के अनुसार ऐसा लगता है कि इन सब स्थितियों के बीच भाजपा आलाकमान को भाजपा की नांव मध्यप्रदेश में ही अटकती सी महसूस हो रही है। जिस पर उचित निर्णय व सबको एक साथ लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
वहीं शर्मा का ये भी मानना है कि मध्यप्रदेश को भाजपा किसी भी स्थिति में हलके में लेकर नहीं चल सकती, क्योंकि यदि पूरानी स्थिति से इस बार भी कुछ नहीं सीखा तो ये भूल भाजपा को काफी भारी पड़ सकती है।
Updated on:
22 Mar 2019 01:11 pm
Published on:
22 Mar 2019 01:09 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
