
घर में जरूर लगाएं ये पौधे, आसपास मच्छर नहीं फटकेंगे
भोपाल. केरवा डैम के आसपास निर्माणों में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। यहां केवल ग्रीनबेल्ट पर ही निर्माण नहीं हुए बल्कि वेटलैंड में भी बंगले और फार्म हाउस बन रहे हैं। मास्टर प्लान के प्रावधानों का जमकर उल्लंघन किया जा रहा है लेकिन जिम्मेदार आंखें बंद किए बैठे हैं। एनजीटी के आदेश के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण निर्माण कार्य लगातार जारी है। इससे यहां पानी प्रदूषित होने के साथ यहां की जैवविविधता पर भी असर पड़ेगा। यह स्थिति तब है जबकि केरवा डैम से कोलार की लाखों आबादी को प्रतिदिन जलप्रदाय भी किया जा रहा है।
केरवा डैम के करीब जब हम मेंडोरी गांव से आगे ऊपर की तरफ जाते हैं तो आगे कुशलपुरा गांव आता है। यहां पर जमकर जमीनों की खरीदी-बिक्री चल रही है। कुशलपुरा गांव में बिल्कुल केरवा डैम के वेटलैंड से लगा हुआ एक फार्म हाउस बन रहा है। फार्म हाउस करीब 5 एकड़ जमीन पर बन रहा है। इसके लिए नीचे की तरफ खुदाई चल रही है और ऊपर निर्माण चल रहे हैं। जब वहां कर्मचारियों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि नीचे की तरफ एक तालाब जैसा बनाया जा रहा है जिसमें साल भर पानी भरा रहेगा। यह फार्म हाउस डैम के एफटीएल के 33 मीटर दायरे में ही बन रहा है। बल्कि इसका कुछ हिस्सा एफटीएल में भी हो सकता है। यदि जांच हो तो हकीकत सामने आ सकती है।
पहले टेकरी के ऊपर बने थे अब नीचे भी बने बंगले
कुशलपुरा गांव में जब मुल्लाजी की टेकरी पर ऊपर चढ़ते हैं तो वहां भी खूब निर्माण हुए हैं। पहले इस टेकरी पर ही निर्माण थे। अब दो बड़े बंगले तो टेकरी के नीचे डैम के वेटलैंड में ही बन गए हैं। दोनों बंगले आधुनिक सुख सुविधाओं से सुसज्जित हैं।
यह है नियम
भोपाल मास्टर प्लान 2005 के अनुसार केरवा डैम के किनारे से 33 मीटर तक का दायरा खुला और ग्रीन बेल्ट के लिए होना चाहिए। इसके साथ 150 हेक्टेयर जमीन पर बॉटनिकल गार्डन और रीजनल गार्डन बनना चाहिए। लेकिन केरवा डैम के आसपास 33 मीटर के दायरे में लगातार निर्माण और कब्जे हो रहे हैं। यह मास्टर प्लान का सरासर उल्लंघन है। यही नहीं यह क्षेत्र बाघ भ्रमण क्षेत्र भी है यहां पर बाघों के साथ तेंदुए और अन्य वन्य जीव भी निवासरत हैं। डैम में भी सैकड़ों जलीय जंतु जैसे मछलियां मगरमच्छ, कछुए आदि निवास करते हैं। लगातार अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियों के कारण इन वन्य और जलीय जीवों के आवास खत्म होते जा रहे हैं। इससे मानवीय जीवन के लिए भी खतरा हो सकता है क्योंकि यह जीव शहर में भी घुसने लगे हैं।
एनजीटी के नोटिस का भी असर नहीं
इस संबंध में हाल ही में डॉ सुभाष सी पांडे और राशिद नूर खान ने एनजीटी में याचिका लगाई है। इसमें मप्र शासन, नगर निगम भोपाल, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, वेटलैंड अथॉरिटी, जल संसाधन विभाग, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, मध्य प्रदेश बायोडायवर्सिटी बोर्ड, कलेक्टर भोपाल और चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट को पक्षकार बनाया गया है। ट्रिब्यूनल ने इन सभी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। लेकिन निर्माण गतिविधियों पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है।
फैक्ट फाइल - केरवा डैम
कुल क्षेत्रफल- 526 हेक्टेयर
कैचमेंट एरिया- 64.5 वर्ग किलोमीटर
जलप्रदाय- 7 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति वर्ष
आबादी को जलप्रदाय- करीब 4 लाख
Updated on:
03 Mar 2022 01:31 am
Published on:
03 Mar 2022 01:25 am
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