
vyapam scam: भोपाल. सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को व्यापमं (प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड) की वनरक्षक परीक्षा- 2012 में फर्जी तरीके से परीक्षा देने वाले 3 लोगों को 7-7 साल की सजा सुनाई है। सीबीआई की विशेष अदालत के जज नीति राज सिंह सिसोदिया ने ये फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस मामले में देवेंद्र कुमार जाटव पुत्र भूषण लाल, पदम सिंह खरे पुत्र मुरारी लाल और आनंद सागर पुत्र अर्जुन प्रसाद को सजा सुनाई। केस में सीबीआई ने फर्जी तरीके से परीक्षा देने वाले 3 और मध्यस्थता करने वाले 7 लोगों के खिलाफ चार्जशीट पेश की। कोर्ट में 43 लोगों की गवाही करवाई गई। इसमें तीन लोगों के खिलाफ आरोप साबित हुए, जबकि सात लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
कोर्ट ने आरोपियों को तीन धाराओं में 2-2 साल की जेल और एक-एक हजार रुपए जुर्माना, जबकि अन्य तीन धाराओं में 7-7 साल की कैद व एक हजार रुपए जुर्माना और दो में तीन हजार का जुर्माना लगाया।मामले में विशेष लोक अभियोजक सतीश दिनकर ने पैरवी की थी।
गौरतलब है कि एसटीफ मुख्यालय को छद्म नामों से 15 अप्रैल 2012 को मध्य प्रदेश वन रक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े की शिकायत मिली थी। इसमें बताया गया कि देवेंद्र जाटव ने फर्जी तरीके से परीक्षा पास की है। एसटीएफ ने व्यापमं और वन विभाग से देवेंद्र कुमार जाटव की जानकारी ली। संदेही देवेंद्र से राइटिंग का नमूना और अंगूठे के निशान लिए गए। इसी तरह, परीक्षा में पास होने वाले अभ्यर्थी पदम सिंह खरे के संबंध में भी जांच की गई। इसमें पाया गया कि दोनों आरोपी अवैध तरीके से फॉरेस्ट गार्ड बने हैं। इसके बाद एसटीएफ ने प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया। जांच में देवेंद्र जाटव का चयन कराने में मध्यस्थ ब्रजमोहन गौड़ व शिव कुमार यादव से कड़ियां जुड़ीं। साजिश के तहत डमी कैंडिडेट बैठाने के लिए रिंकू शर्मा से संपर्क किया गया था। कायमी के 3 दिन पहले रिंकू शर्मा ने सुसाइड कर लिया था। इस कारण देवेंद्र के डमी कैंडिडेट का नाम सामने नहीं आ सका।
Published on:
28 Mar 2022 10:50 pm
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