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गजब की तकनीक! 150 फीट सूखे बोर में 5 फीट पर पानी, महज 200 रुपए का खर्च

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने भी की प्रशंसा  

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केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने भी की प्रशंसा

भोपाल। पुरानी पद्धति और नई तकनीक का यह मेल गजब का परिणाम दे रहा है। ग्वालियर के युवा पंकज तिवारी ने यह सिस्टम तैयार किया है जिसस न सिर्फ सूखे बोरवेलों से पानी मिलने लगा है, बल्कि जलस्तर में भी जबर्दस्त उछाल आ गया है। मध्यप्रदेश के साथ ही अन्य प्रदेशों में भी इस सिस्टम का इस्तेमाल कर पानी निकाला जा रहा है. इसके लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा पंकज तिवारी को जल प्रहरी व वाटर हीरो सम्मान से सम्मानित किया गया है.

जिन—जिन जगहों पर यह सिस्टम लगा, वहां भूमिगत जलस्तर 100 फीट तक बढ़ गया-पंकज तिवारी के यह वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम देशभर में करीब एक हजार स्थानों पर लगाया जा चुका है। जिन—जिन जगहों पर यह सिस्टम लगा, वहां भूमिगत जलस्तर 100 फीट तक बढ़ गया। सिस्टम में बरसाती पानी के शुद्धिकरण की भी व्यवस्था है। इस वजह से ये पानी बिना फिल्टर के भी पीने योग्य रहता है। पंकज ने इस रेन वाटर प्यूरीफिकेशन एंड रीचार्जिग सिस्टम का पेटेंट भी करा लिया है। सबसे खास यह है कि इस सिस्टम के रखरखाव का खर्च सालाना सिर्फ 200 रुपए है।

इसमें 73 फीट पर पानी है जबकि संस्थान का औसत जलस्तर 120 फीट - आइआइटीटीएम डायरेक्टर प्राे. आलोक शर्मा के अनुसार हमने पहली बार वाटर हार्वेस्टिंग कराई। पिछले दिनों जब जांचा तो इसमें 73 फीट पर पानी है जबकि संस्थान का औसत जलस्तर 120 फीट पर है।

— ग्वालियर के भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान में बोरवेल सूख गया था. 250 फीट के इस बोरवेल में अब 73 फीट पर पानी है।
— सिवनी में बारह पत्थर निवासी दिलीप तिवारी ने तीन साल पहले गर्मी में यह सिस्टम लगवाया था। पहली बरसात में ही उनका बोर ओवरफ्लो हो गया।
- गंगा किनारे के प्रयागराज में भी यह सिस्टम लगा है। रैपिड एक्शन फोर्स परिसर में भी अब महज 100 फीट पर पानी है।
— महाराजपुरा थाने में 150 फीट गहरे सूखे बोरवेल में अब महज 5 फीट पर पानी है।