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तालाब का पानी लगातार हो रहा दूषित, कलेक्टर ने कृषि विभाग को जिम्मेदारी सौंपी

कृषी विभाग को जिम्मेदारी, कार्यशाला आयोजित कर किसानों को दी जाएगी समझाइश

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bada talab

jabalpur saving her ponds with bhopal ponds model

भोपाल। बड़ा तालाब का पानी लगातार दूषित होता जा रहा है। हाल ही में प्रदूषण विभाग की रिपोर्ट ने इसकी पुष्टि की है। इस संबंध में सोमवार को कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने कैचमेंट एरिया में हो रही खेती में केमिकल व अन्य रसायनों का उपयोग न हो इसके लिए कृषि विभाग को जिम्मेदारी सौंपी है।

उपसंचालक को निर्देश दिए, ऑर्गेनिक खेती के लिए प्रेरित करें
कलेक्टर ने कृषि विभाग के उपसंचालक को निर्देश दिए हैं कि वे कैचमेंट में खेती करने वाले किसानों की कार्यशाला आयोजित कर उन्हें समझाइश दें कि वे पेस्टीसाइड्य, उर्वरकों की निश्चित मात्रा में उपयोग करें और किसानो को ऑर्गेनिक खेती के लिए प्रेरित करें।

पानी और और दूषित कर रहे
कलेक्टर ने कृषि विभाग के उपसंचालक को निर्देश देते हुए कहा कि क्योंकि खेती में उपयोग हो रहे खतरनाक रसायन बरसात के पानी के साथ बड़ा तालाब में मिलकर पानी और और दूषित कर रहे हैं। पत्रिका लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है। इसके बाद ही प्रशासन ने ये कदम उठाते हुए कृषि विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है।


20 साल पुरानी स्थिति में लौटना होगा
बड़ा तालाब को बचाने के लिए अभी से प्रयास कर 20 साल पुरानी स्थिति को रिकॉल करना होगा। उस समय खेती में रसायन और कीटनाशक नाम मात्र के लिए मिलाए जाते थे। कैचमेंट में काफी पेड़ पौधे थे, अब उसी तरह घने प्लांटेशन की जरूरत है। पेड़ पौधो की नमी से कैचमेंट की मिट्टी पथरीली नही होती। खेती में रसायनों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित करना होगा।

इन क्षेत्रों में होती है ज्यादा खेती
बैरागढ़, बरखेड़ानाथू, स्पॉटर्स एकेडमी के पास, बिशनखेड़ी, गौरा गांव, सूरजनगर, बरखेड़ा आदि सहित अन्य जगहों पर कैचमेंट एरिया में खेती की जाती है। लंबे समय से हो रही इस खेती को लेकर कभी कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। पहली बार प्रशासन लगातार सख्ती के निर्देश दे रहा है।