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दस साल हुए, कहां हैं भोपाल का नर्मदा जल

- नर्मदा जल सात लाख तक पहुंचना था, दो लाख तक ही सीमित

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11 साल पहले बन गई पानी की टंकी, अब तक कनेक्शन नहीं, बिना उपयोग हुई जर्जर

11 साल पहले बन गई पानी की टंकी, अब तक कनेक्शन नहीं, बिना उपयोग हुई जर्जर

भोपाल. नर्मदा जल से शहर के सात लाख लोगों तक पहुंचना था, लेकिन प्रोजेक्ट से जुड़े इंजीनियर- अफसरों की लापरवाही और अक्षमता का ही नतीजा है कि महज दो लाख लोगों तक ही पानी पहुंच पा रहा है, जबकि प्रोजेक्ट को 11 साल का समय पूरा हो गया है। अरेरा कॉलोनी से लेकर पुराने शहर के काकी केम्प क्षेत्र तक लोग नर्मदा का इंतजार ही कर रहे हैं। कोलार से जलापूर्ति वाले 12 लाख लोगों में से पांच लाख को नर्मदा से जोड़ दिया जाता तो अभी कोलार लाइन फूटने पर बने जलसंकट से इन्हें बचाया जा सकता था।

नर्मदा के नाम लाइन बिछाई, पानी कोलार का
नर्मदा का पानी देने के नाम पर बीते 10 सालों में 1000 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके तहत ढाई हजार से 3000 किलोमीटर लंबी डिस्ट्रीब्यूशन लाइन डाली जा चुकी है, लेकिन उसमें नर्मदा की बजाए पुरानी लाइन से आ रहे कोलार प्रोजेक्ट का पानी ही भेजा जा रहा। ऐसे में जब भी कोलार प्रोजेक्ट की फीडर लाइन में कोई फाल्ट होता है तो शहर का एक बड़ा हिस्सा जल संकट की जद में चला जाता है।

महज 70 फीसदी तक ही नलजल
करीब 23 लाख की आबादी वाले भोपाल में 70 फ़ीसदी आबादी को ही नल जल से जल आपूर्ति हो पा रही है। इसमें भी 70 फ़ीसदी कोलार प्रोजेक्ट से जलापूर्ति हो रही है। संख्या की बात करें तो फिलहाल 17 लाख लोगों तक नल जल है और इसमें 70 फीसदी कोलार से जलापूर्ति की स्थिति में आंकड़ा 12 लाख के करीब बनता है। नर्मदा पर पीएचई और निगम ने मिलकर बड़ा खर्च किया, लेकिन 10 साल में शहर के दो लाख लोगों तक भी नर्मदा का पानी नही पहुंचा पाए।

750 कालोनियों के नर्मदा के लिए आवेदन
नर्मदा का पानी सिर्फ होशंगाबाद रोड से जुड़ी कालोनियों तक ही सिमट कर रह गया। इसकी जांच हो तो इस बड़े प्रोजेक्ट का भृष्टाचार खुलकर सामने आए। करीब 750 निजी कॉलोनियों के निवासियों ने नर्मदा कनेक्शन का आवेदन किया हुआ है, लेकिन वह नही मिल रहा। सिस्टम चार्ज के नाम पर कालोनियों को 10 लाख रुपए तक के बिल थमाए गए।

इनका कहना
हम संपत्ति कर के साथ नर्मदा उपकर जमा कर रहे हैं, लेकिन अब तक नर्मदा का पानी नहीं दिया जा रहा? कोलार लाइन लीकेज से बार-बार परेशान होना पड़ता है।
- जेएस दुबे, 1250 क्षेत्र
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कोट्स
बेहतर जलापूर्ति जरूरी है। नर्मदा समेत सभी स्त्रोतों से पूरा पानी लेकर लोगों की जल जरूरत पूरी करने के प्रयास जारी है। नई लाइन बिछाई जा रही है और पूरी क्षमता के साथ नर्मदा जल को लोगों तक पहुंचाएंगे।
- गुलशन बामरा, संभागायुक्त- प्रशासक