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चंबल एक्सप्रेस-वे का रास्ता हुआ साफ, केन्द्र की शर्त पर राज्य ने 1150 हेक्टेयर मुफ्त जमीन देने पर दी सहमति

- केन्द्र भारत माला प्रोजेक्ट में बनाएगी एक्सप्रेस वे- मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक - कैबिनेट से प्रस्ताव मंजूर कर केन्द्र को भेजा जाएगा- किसानों को उनकी जमीन के बदले देगी ज्यादा मूल्य की जमीन

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cm kamalnath

Jabalpur. Cabinet meeting in the city is to complete one year. Chief Minister Kamal Nath made 14 important announcements on 16 February 2019

लंबे समय से अटके चंबल एक्सप्रेस वे के बनने का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने केन्द्र की शर्त मान ली है, जिसमें केन्द्र ने एक्सप्रेस वे के लिए मुफ्त में जमीन मांगी थी। गुरुवार को मुख्य सचिव एसआर मोहंती की अध्यक्षता में एक्सप्रेस-वे के लिए केन्द्र सरकार को जमीन देने के संबंध में बैठक हुई। मुख्यसचिव ने अफसरों से कहा कि तत्काल जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई की जाए। बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि किसानों को उनकी जमीन के बदले ज्यादा मूल्य की जमीन दी जाए तो सरकार को भूमि अधिग्रहण के लिए पैसा खर्च नहीं करना होगा। श्योपुर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि हमने एक्सप्रेस वे के आस-पास उन एरिया को भी चिन्हित कर लिया है जहां इंडस्ट्रीयल टाउनशिप, होटल और कामर्शियल कॉरिडोर बनाया जा सकता है।

मुख्य सचिव ने एमपीआरडीसी के एमडी सुदाम खाड़े से इसका प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट में लाने को कहा है, जिससे जल्द से जल्द एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण का काम शुरु किया जा सके। बैठक में बताया कि इस एक्सप्रेस-वे के लिए 1150 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। इसमें 550 हेक्टेयर जमीन सरकारी है, ऐसे में 550 हेक्टेयर जमीन किसानों से अधिग्रहित करनी होगी। मुख्य सचिव ने कहा कि आप जमीन अधिग्रहण का मॉडल प्रस्ताव बनाकर ले आएं, कैबिनेट में इस पर निर्णय लिया जाएगा। श्योपुर और मुरैना कलेक्टर को जमीन अधिग्रहण और बदले में दी जाने वाली जमीन का चिन्हांकन करने की जिम्मेदारी दे दी गई है।
केन्द्र ने पहले 75 प्रतिश राशि पर दी थी, सहमति बाद में मना किया
दरअसल, केंद्र सरकार ने भारतमाला प्रोजेक्ट में चंबल एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण की 75 प्रतिशत राशि देने की बात कही थी।

इसमें राज्य को अपने हिस्से की 25 फीसदी राशि मिलाना थी। लेकिन, बाद में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पैसा न होने का हवाला देते हुए भूमि अधिग्रहण के लिए राशि देने से इनकार कर दिया। अब राज्य सरकार भूमि अदला-बदली का फॉर्मूला अपना कर जमीन अधिग्रहण करेगी।

- कितनी जमीन, कितनी दूरी

सिक्स लेन चंबल एक्सप्रेस-वे मध्यप्रदेश राजस्थान और उत्तर प्रदेश से होकर गुजरेगा। इसमें 283 किमी की दूरी तक एक्सप्रेस-वे रहेगा, जिसमें 195 किमी मप्र का क्षेत्र रहेगा। इसके लिए 1150 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित होना है। इसमें 750 हेक्टेयर जमीन सरकारी और 800 हेक्टेयर किसानों की है। इस पर 305 करोड़ का खर्च आना है। वहीं पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 850 करोड़ रुपए का खर्च आना है।

- दो जिले, 155 गांव होंगे प्रभावित
चंबल एक्सप्रेस-वे के लिए मुरैना और श्योपुर जिले की आठ तहसीलों के बीहड़ों की जमीन का उपयोग होगा। इससे 115 गांव सीधे तौर पर एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर से जुड़े रहेंगे। इनमें 55 गांव मुरैना के हैं।

- कॉरिडोर डवलपमेंट प्रोजेक्ट भी रहेगा

इस एक्सप्रेस-वे के कॉरिडोर में चुनिंदा स्थलों पर डवलपमेंट प्रोजेक्ट अलग से डिजाइन किए जाने हैं। इसके तहत व्यावसायिक गतिविधियों से लेकर मनोरंजन और पर्यटन के केंद्र भी विकसित होंगे। इसमें लॉजिस्टिक पार्क, मनोरंजन केंद्र, अस्पताल, मनोरंजन केंद्र, रिसॉर्ट व स्मार्ट सिटी तक को लेकर डिजाइन तैयार होंगे।
- क्या है स्थिति

283 किमी लंबा बनेगा एक्सप्रेस-वे
195 किमी क्षेत्र मप्र से गुजरेगा

850 करोड़ रुपए कुल लागत
305 करोड़ जमीन अधिग्रहण में लगना

75 फीसदी राशि पहले केंद्र से मिलना थी
100 फीसदी राशि अब मप्र के जिम्मे आई

चंबल एक्सप्रेस-वे को लेकर जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाने के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। कैबिनेट में तय होगा कि भूमि अधिग्रहण किस मॉडल पर किया जाए। इसमें एक मॉडल भूमि की अदला-बदली का भी है।

- एसआर मोहंती, मुख्य सचिव