16 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

वेस्टर्न डिस्टरबेंस से एमपी में बदला मौसम, कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट

Rain And Thundershower Alert : उत्तरी क्षेत्र में सक्रीय हो रहे नए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में अगले कुछ घंटों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार जताए जा रहे हैं।

2 min read
Google source verification
Rain And Thundershower Alert

एमपी में फिर बदला मौसम (Photo Source- Patrika)

Rain And Thundershower Alert :मध्य प्रदेश में एक तरफ तो दिन में तीखी धूप और सर्द रातों का दौर जारी है तो वहीं, उत्तरी क्षेत्र में सक्रीय हो रहे नए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में अगले कुछ घंटों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार जताए जा रहे हैं। भोपाल स्थित मौसम विभाग के अनुसार, ग्वालियर-चंबल के साथ-साथ सागर और उज्जैन संभाग के जिलों में 18 और 19 फरवरी को बादल छाए रहने के साथ बारिश की संभावना दताई गई है।

बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेशभर में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिला। दिन के तापमान में तीखी धूप तो रात में ठंडक महसूस करा रही हैं। खंडवा और खरगोन में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जबकि नरसिंहपुर, सागर, सतना और उमरिया में पारा 30 डिग्री या इससे अधिक दर्ज किया गया। इससे गर्मी का एहसास बढ़ा है। रात के न्यूनतम तापमान की बात करें तो कटनी जिले का करौंदी सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 8.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। पचमढ़ी में 9.2 डिग्री, कल्याणपुर में 9.4 डिग्री और रीवा में 9.6 डिग्री रहा। इन इलाकों में सुबह-शाम ठंडक बनी रही, जबकि मैदानी इलाकों में दिन गर्म रहे।

17 से 19 फरवरी के बीच दिखेगा असर!

मौसम विभाग के अनुसार, वेस्टर्न डिस्टरबेंस का सीधा असर प्रदेश पर कम है, फिर भी इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव 17 से 19 फरवरी के बीच दिख सकता है। ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, श्योपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जैसे जिलों में हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। उज्जैन संभाग में भी बादलों की आवाजाही बढ़ सकती है, जिससे भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में भी बादल छाए रहने की संभावना है। यह फरवरी महीने में तीसरी बार बारिश का दौर हो सकता है। महीने की शुरुआत में हुई बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे भी कराया। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम के बदलाव पर नजर रखें।