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पेशाब कांड के आरोपी पर लगा है NSA, जानिए क्यों घबराते हैं इस कानून से लोग?

what is NSA-मध्यप्रदेश के पेशाब कांड के बाद आरोपी के ऊपर लगाया गया एनएसए, जानिए क्या है इसमें कानून प्रावधान...।

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भोपाल

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Manish Geete

Jul 06, 2023

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मध्यप्रदेश में पेशाब कांड की हर तरफ चर्चा है। इस कांड ने दुनियाभर में मध्यप्रदेश की किरकिरी करवा दी। सियासी घमासान मचने के बाद राज्य सरकार ने आरोपी प्रवेश शुक्ला पर एनएसए (NSA) की कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री के एक्शन के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उसका मकान का अवैध हिस्सा भी तोड़ दिया। आपने भी एनएसए के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं इस कानून के बारे में? इस कानून में किस प्रकार की सजा का प्रावधान होता है? एनएसए अपने आप में बहुत कड़ा कानून है, जिससे हर अपराधी घबराता है। आइए जानते हैं क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और क्या है इसके प्रावधान...।


patrika.com पर जानिए क्या होता है NSA...। कितना कठोर है यह कानून?

क्या है (national security act) रासुका

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, यानी नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) एक ऐसा कानून है जिसमें कड़े प्रावधान किए गए हैं। 1980 में देश की सुरक्षा के लिहाज से यह कानून बनाया गया है। यह केंद्र या राज्य सरकार को और अधिक शक्ति देता है। इसमें प्रावधान है कि यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति देश के लिए या जनता के लिए खतरा लगता है तो उसे बगैर जमानत के तीन माह तक हिरासत में रखा जा सकता है। अपराधी को एक साल तक के लिए भी जेल में रखा जा सकता है। एक साल तक उसकी सजा न कम हो सकती है न बदली जा सकती है। जिस अपराधी पर एनएसए लगाया जाता है उसे आसानी सा जमानत नहीं मिल पाती है। इसीलिए अपराधी प्रवृत्ति के लोग एनएसए (NSA) से डरते हैं।

किसके आदेश पर लगता है NSA

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) संबंधित जिले के कलेक्टर के आदेश पर लगाया जाता है। यदि कोई अपराधि प्रवृत्ति का व्यक्ति जमानत पर है, उसके खिलाफ भी रासुका लगाया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को केस से बरी भी कर दिया तो उस पर भी एनएसए के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए अपराधि प्रवृत्ति के लोग ऐसे कानूनों से घबराते हैं।

जमानत का क्या है प्रावधान?

इस कानून के तहत सालभर के लिए तो जमानत मिलना मुश्किल होती है। इस धारा के लग जाने से अपराधी को जमानत नहीं दी जा सकती। न ही उस फैसले में कोई संशोधन किया जा सकता है।

कब होती है गिरफ्तारी

0-यदि सरकार को लगता है कि कोई संदिग्ध व्यक्ति देश की सुरक्षा के खिलाफ है और खतरा बन सकता है तो उसे गिरफ्तार किया जा सकता है।

0-यदि सरकार को लगता है कि कोई व्यक्ति कानून-व्यवस्था चलाने में उसके सामने बाधा बनता है तो वह उसे गिरफ्तार करने का आदेश दे सकती है।

0-यदि सरकार को लगता है कि कोई व्यक्ति अति आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति में बाधा बन रहा है तो वह उसे गिरफ्तार कर सकती है। इस कानून के अंतर्गत जमाखोरों पर भी कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।

0- इस कानून का उपयोग जिला दंडाधिकारी (कलेक्टर), पुलिस आयुक्त, राज्य सरकार अपने दायरे में कर सकते हैं।

0-एनएसए के तहत पुलिस किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को पकड़कर गिरफ्तार कर सकती है। उसे तीन माह तक बगैर जमानत के ही हिरासत में रहना होगा। हिरासत में रखने के लिए आरोप तय करने की भी जरूरत पुलिस को नहीं होती है। तीन माह के बाद भी उसे 1 साल तक जमानत नहीं मिल सकती है।

यह है एक्ट का इतिहास

ब्रिटिश शासन से जुड़ा यह कानून है, इसका मतलब है कि किसी घटना के होने से पहले ही संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में ले लिया जाता है। 1881 में ब्रिटिशर्स ने बंगाल रेगुलेशन थर्ड नाम का कानून बनाया था। इसमें घटना से पहले ही गिरफ्तारी करने का प्रावधान किया गया था। उसी के बाद 1919 में रोलेट एक्ट लागू हुआ, जिसमें व्यक्ति को ट्रायल तक की छूट नहीं दी गई थी। जब भारत आजाद हुआ तो प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने 1950 में प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट लागू किया। 1980 में इंदिरा गांधी की सरकार के समय 23 सितंबर 1980 को संसद ने पास करवाकर इसे कानून बना दिया गया।