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MP Election: कौन बनेगा मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री, एक बार फिर शिवराज या फिर ये मारेंगे दांव

Who Will Be CM of MP: मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनाने जा रही है, अब सवाल यह है कि इतने बड़े बहुमत के बाद मुख्यमंत्री कौन होगा? शिवराज सिंह चौहान को स्वाभाविक तौर पर आगे माना जा रहा है, लेकिन कई और भी छुपे दावेदार हैं जो रेस में आगे निकल सकते हैं।

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Road-show - People gathered to welcome Chief Minister Shivraj Singh Chouhan

Road-show - People gathered to welcome Chief Minister Shivraj Singh Chouhan

मध्यप्रदेश में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? शिवराज सिंह चौहान वापस मुख्यमंत्री बनेंगे या फिर किसी और को यह जिम्मेदारी मिलेगी? चुनाव में जीतकर आए बड़े दिग्गज नेताओं का क्या होगा? क्या मध्यप्रदेश में रुकेंगे या फिर इस्तीफा देकर वापस केंद्र की राजनीति में लौट जाएंगे? अगर मध्यप्रदेश में रुकेंगे तो फिर उनकी भूमिका क्या होगी? कई तरह के सवाल इस समय मध्यप्रदेश की राजनीति में शुरू हो गए हैं। शिवराज सिंह चौहान स्वाभाविक तौर पर मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे हैं, लेकिन इसके अलावा भी आधा दर्जन नेता हैं जो अचानक से चौंका सकते हैं।

ओबीसी चेहरे में दो नाम
मध्यप्रदेश में अगर भाजपा ओबीसी के साथ ही आगे बढ़ने की तैयारी करती है तो फिर स्वाभाविक तौर पर उसके पास पहली पसंद के तौर पर शिवराज सिंह चौहान हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। लेकिन भाजपा का एक धड़ा उन्हें अब केंद्र की राजनीति में लेकर जाने की वकालत कर रहा है। ऐसे में दूसरे ओबीसी नेता के तौर पर प्रहलाद पटेल का नाम आ रहा है, जिन्होंने सोमवार को केंद्रीय मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। नरसिंहपुर से विधायक बनकर विधानसभा में आए हैं, केंद्रीय मंत्री हैं और शिवराज सिंह से आगे की पीढ़ी के नेता माने जाते हैं। अटल सरकार में भी केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं।

क्या आदिवासी मुख्यमंत्री
बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा मध्यप्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री को आगे कर सकती है, लेकिन अभी इसके लिए उसके पास कोई सर्वमान्य चेहरा नहीं है। केंद्रीय मंत्री और आदिवासी नेता फग्गन सिंह कुलस्ते चुनाव हार गए हैं। लेकिन कहा जा रहा है कि चुनाव हारने और जीतने से फर्क नहीं पड़ता है, अगर केंद्रीय नेतृत्व चाहेगा तो फग्गन सिंह भी दावेदार हो सकते हैं। उनके मैदान में आने से कई आदिवासी सीटों पर भाजपा को फायदा हुआ है और उन्हें जीतने में भाजपा को सफलता मिली है।

क्या होगा नरेंद्र सिंह तोमर और कैलाश विजयवर्गीय का
सबसे बड़ा सवाल यह है कि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का क्या होगा? कैलाश जहां खुद को मुख्यमंत्री प्रायोजित करते घूम रहे हैं, वहीं नरेंद्र सिंह तोमर अपनी गंभीरता के साथ खामोश हैं। कहा जा रहा है कि नरेंद्र सिंह तोमर अपना समर्थन शिवराज के चेहरे पर दे सकते हैं। सबसे मुश्किल में कैलाश विजयवर्गीय हैं, जिन्हें वापस मध्यप्रदेश की विधानसभा में एंट्री मिली है। अगर कोई दूसरा मुख्यमंत्री बनता है तो फिर क्या कैलाश वहीं से शुरू करेंगे, जहां से मध्यप्रदेश की राजनीति छोड़कर गए थे। उन्हें वापस मंत्री बनकर संतोष करना होगा। डिप्टी सीएम के फार्मूले की बात कही जा रही है, लेकिन उसके जातीय गणित के फार्मूले में यह दोनों नेता फिट नहीं बैठते हैं। अब संकट यह है कि नरेंद्र सिंह तोमर अगर मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे तो फिर क्या मंत्री बनने के लिए तैयार होंगे या फिर विधानसभा से इस्तीफा देकर केंद्रीय मंत्री बने रहेंगे।

ज्योतिरादित्य सिंधिया और वीडी शर्मा
मुख्यमंत्री के दावेदारों में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भी गिना जा रहा है। मध्यप्रदेश के यही दो बड़े नेता ऐसे थे, जिन्होंने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा। ऐसे में यह चौंकाने वाले नाम हो सकते हैं। सिंधिया राज्यसभा सदस्य हैं और केंद्रीय मंत्री भी। जबकि वीडी शर्मा खजुराहो से सांसद हैं। लेकिन वीडी के लिए मुश्किल यह है कि वह ब्राहृमण नेता हैं और मध्यप्रदेश में भाजपा के भीतर फिलहाल ब्राहृमण मुख्यमंत्री की संभावनाएं काफी कम हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया जरूर भाजपा में आने के बाद से खुद को कई बार सार्वजनिक तौर पर ओबीसी बोल चुके हैं। ऐसे में इनके चेहरे भी मैदान में बचे हुए हैं।

क्या आएंगे दो डिप्टी सीएम
भाजपा के अंदर अभी कई तरह के कयास चल रहे हैं, लेकिन अभी तक विधायक दल की बैठक की तारीख तय नहीं हुई है। न ही अभी तक केंद्रीय पर्यवेक्षक तय हुए हैं, ऐसे में सिर्फ कयासबाजी चल रही है। माना जा रहा है कि इस बार मुख्यमंत्री कोई भी बने, उत्तर प्रदेश की तरह दो डिप्टी सीएम मिल सकते हैं। अगर ओबीसी सीएम बना तो फिर एक एसटी और एक एससी डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं, ब्राहृमण के तौर पर प्रदेश अध्यक्ष रखा जा सकता है। हालांकि इस फार्मूले पर भाजपा के भीतर से कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।

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