
शीतला माता को ठंडे और बासी भोजन का ही भोग क्यों लगाया जाता है, इससे पीछे है एक दयालु व्यक्ति की कहानी,शीतला माता को ठंडे और बासी भोजन का ही भोग क्यों लगाया जाता है, इससे पीछे है एक दयालु व्यक्ति की कहानी,शीतला माता को ठंडे और बासी भोजन का ही भोग क्यों लगाया जाता है, इससे पीछे है एक दयालु व्यक्ति की कहानी
भोपाल. शीतला अष्टमी को शीतला माता की पूजन होती है, एक दिन पहले रात्रि में व्यंजन बनाए जाते हैं, जिन्हें अष्टमी पर भोग लगाया जाता है। परिवार इन्हीं का सेवन करता है। शीतला माता को शीतल चाहिए, ठंडा रखने के लिए इनके पूजन में अगरबत्ती और दीपक भी नहीं जलाया जाता। पंडित जगदीश शर्मा बताते हैं, शीतला माता देवी का रूप हैं। एक बार उन्होंने सोचा कि कौन मेरी पूजन कर सकता है, इसलिए वे धरती पर आईं? उनका भेष साधारण था, उनके भ्रमण के दौरान किसी ने उन पर अंगारे फेंक दिए जिसके चलते उनके शरीर पर फफोले पड़ गए, इससे उन्हें बहुत जलन हुई, देवी इस अवस्था में भ्रमण करने लगी, इस बीच उन्हें एक दयालु व्यक्ति मिला जिसने उन्हें दही और ठंडा पानी पीने को दिया। माता भूखी भी थीं, उसने कहा माता मेरे पास आपको खिलाने के लिए कुछ नहीं है, रात का भोजन रखा हुआ है आपको कैसे दूं? देवी ने कहा तुम निसंकोच वही ले आओ, भक्त ने बासे भोजन एवं ठंडे पकवानों का भोग लगाया जिससे देवी प्रसन्न हुईं। देवी ने अंगारे फेंकने वाले को श्राप दिया, वहीं भोजन देने वाले को आशीर्वाद देते हुए कहा कि अबसे मेरी पूजा ठंडे व्यंजनों से होगी और मुझे बासे भोजन का ही भोग लगाया जाएगा।
महिलाओं ने संतानों की लम्बी उम्र की प्रार्थना की
शीतला अष्टमी के पर्व पर शहर के शीतला माता के मंदिरों में महिलाओं की कतारें लगी रहीं। महिलाओं ने माता की पूजा की और अपनी संतानों की लम्बी उम्र की प्रार्थना की। माता को बासे व्यंजनों का भोग लगाया गया, वहीं भक्तों ने घर पर भी बासे व्यंजनों का सेवन किया। शीतला अष्टमी पर शहर के फतेहगढ़ स्थित शीतला माता मंदिर, माता मंदिर चौराहा स्थित शीतला माता मंदिर, वैष्णव धाम सहित अन्य मंदिरों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने पहुंचकर पूजा-अर्चना की। शीतला अष्टमी के पर्व पर महिलाओं ने अपनी संतान की लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए व्रत रखा और शीतला माता की पूजा-अर्चना की। शीतला माता को बासे व्यंजनों का भोग लगाया गया। शीतला माता मंदिरों में बड़ी संख्या में महिलाएं जल अर्पित करने और पूजा-अर्चना करने पहुंची।
सप्तमी और अष्टमी दोनों दिन पूजन
पंडितों का कहना है कि शीतला सप्तमी और अष्टमी दोनों ही दिन शीतला माता की पूजा का विधान है। यह व्रत पर्व है और पुत्रवती महिलाएं यह व्रत अपने संतान की लंबी उम्र और आरोग्य के लिए करती है। यह व्रत पर्व कुल परंपरा के अनुसार कुछ लोग शीतला सप्तमी के रूप में तो कुछ शीतला अष्टमी के दिन मनाते हैं। जो सप्तमी मनाते हैं, वे छठ के दिन व्यंजन बनाकर सप्तमी पर शीतला माता को भोग लगाते हैं, इसी तरह जो लोग अष्टमी मानते हैं, वे सप्तमी के दिन पकवान बनाकर अष्टमी पर भोग लगाते हैं। इसे बासोरा भी कहा जाता है।
Published on:
17 Mar 2020 08:20 pm
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