
भोपाल/ पत्नी करती रही लंबी उम्र की कामना और पति ने आधे रास्ते में ही साथ छोड़ दिया। जिस हाथों में पति के नाम की मेहंदी रचाती थी, उन्हीं हाथों से उसे अपने पति को मुखाग्नि देनी पड़ी। बच्चे भोपाल से 45 किमी दूर थे और देवर उसी अस्पताल में भर्ती था जिस अस्पताल में पति की मौत हुई। लेकिन मजबूरी देखो महिला पर पड़े इस दुख में ढांढस बंधाने के लिए कोई नहीं था। इतना ही नहीं पति की मौत के बाद चार कंधे भी नहीं मिले तो महिला अपनी सहेली के साथ खुद पति की देह को एम्बुलेंस से विश्राम घाट लेकर पहुंची और उसे मुखाग्नि दी। इस स्थिति में टूटकर बिखरने के बजाय महिला ने अपने सिंदूर का फर्ज निभाया।
ये है पूरा मामला
अमित अग्रवाल 22 अप्रैल को सर्दी, जुकाम और खांसी की शिकायत लेकर जिला अस्पताल पहुंचा था। उसे सांस लेने में दिक्कत होने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जिसके बाद हालत और बिगड़ गई। गुरुवार के दिन जिला अस्पताल में डॉक्टर्स ने उसे हमीदिया अस्पताल रेफर कर दिया। हमीदिया अस्पताल में अमीत को कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया जिसके बाद शुक्रवार को उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया। 23 अप्रैल को छोटे भाई को भी हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में देवर होने के बावजूद महिला अकेली थी, लेकिन कोई मदद नहीं ले सकी। वहीं लॉक डाउन के कारण बाकी परिजन के साथ पांच और आठ साल के बच्चे भी भोपाल नहीं आ पाए। आखिरी बार अपने पिता के दर्शन भी नहीं कर पाए।
डॉक्टरों ने नहीं मिली शव को घर ले जाने की इजाजत
वर्षा पति की मौत के बाद शव को घर ले जाना चाहती थी, जिसकी इजाजत डॉक्टर्स द्वारा नहीं मिली। क्यूंकि पति कोरोना संदिग्ध था और जांच की रिपोर्ट नहीं आई थी। लेकिन पत्नी ने किसी को रास्ता ना देखते हुए खुद ही पति को अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया और शव को एंबुलेंस में डालकर अकेली ही सुभाषनगर विश्राम घाट पहुंच गई। महिला के साथ एंबुलेंस में ड्राईवर के साथ कोई और मौजूद नहीं था। वहीं जिला अस्पताल में अमित के संपर्क में आई चार नर्स, एक वार्डबॉय, ड्रेसर और सुरक्षाकर्मियों को क्वारैंटाइन किया गया है।
विश्राम घाट के कर्मचारी मदद के लिए आए आगे
जब महिला अपने पति का देह लेकर विश्रामघाट पहुंची तो वहां के तीन कर्मचारी मदद के लिए आगे आए और उन्होने वर्षा की मदद की। इस बीच विश्रामघाट में वर्षा की सहेली अपने पिता के साथ वहां पहुंची। वर्षा ने नम आंखों से लड़खड़ाते कदमों से अपने पति को मुखाग्नि दी।
लॉकडाउन में जरुरमंदों के लिए बना रहे थे भोजन
अमित अपने पिता सुखलाल अग्रवाल के साथ रायसेन में टिफिन सेंटर चलाते थे। पत्नी वर्षा सहकारी बैंक रायसेन में कार्यरत थी। अमित और उसके पिता को लॉकडाउन के दौरान नगर पालिका के सहयोग से पुलिसकर्मियों व जरुरतमंदों को भोजन उपलब्ध करवाने का काम मिला था। लेकिन तबीयत बिगड़ने के बाद उनसे यह ठोका वापस ले लिया गया।
Updated on:
25 Apr 2020 12:25 pm
Published on:
25 Apr 2020 12:09 pm
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