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अब फर्जी बैंकिंग और चिटफंड कंपनियों पर शिंकजा कसना आसान हो गया है। केन्द्र सरकार के नए कानून द बैनिंग ऑफ अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट स्कीम को मध्यप्रदेश में लागू करने के लिए कमलनाथ सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके अनुसार अब जिले स्तर पर अपर कलेक्टर, संभाग स्तर पर संभागीय आयुक्त और राज्य स्तर पर होम सेक्रेटरी अधिकार दिए गए हैं। जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले कारोबारियों पर छापामार कार्रवाई कर इनकी संपत्तियों को कूर्क करने की कार्रवाई कर सकेंगे। इन कंपनियों को बंद करने के लिए सख्ती करने के अन्य कदम उठाने के अधिकार भी दिए गए हैं। यदि इन कंपनियों का कारोबार एक राज्य से ज्यादा क्षेत्र में है तो सीबीआई जांच करेगी।
इसलिए दिए अधिकार
प्रदेश में पिछले पंद्रह सालों में संभागों के कमिश्नर महज रस्म-अदायगी के अधिकारों तक सीमित हो गए है, जबकि मैदानी अफसरों में कलेक्टर सबसे पॉवरफुल है। अब कमलनाथ सरकार लगातार कमिश्नरों को वापस पॉवरफुल कर रही है। इसके तहत केंद्र के द बैनिंग ऑफ अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट स्कीम एक्ट का प्रदेश में नोटिफिकेशन किया गया, तो कमिश्नर को सबसे ज्यादा अधिकार दिए गए हैं।
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इन पर होगी कार्रवाई
- अवैध तरीके से पैसा जमा कराने वाली कंपनियां, सोना-चांदी के नाम पर डिपॉजिट करवाने वाले, सोना-चांदी जीतने का ऑफर देकर ठगने वाले, आरबीआई से बिना रजिस्टर्ड बैंक बनाने वाली कंपनियां-संस्थान, चिटफंड, पोंजी कंपनियां। इसमें अवैध तरीके से आर्थिक ठगी के सारे तरीके दायरे में आएंगे।
ये होती है पोंजी कंपनी
पोंजी कंपनी वह होती है, जो बहुत से लोगों से पैसा इकठ्ठा करके किसी एक को रिटर्न में देती है। फिर उस रिटर्न की मार्केटिंग करके और पैसा इकठ्ठा करती है। इसमें अधिकतर लोगों का पैसा डूब जाता था। इस पैटर्न सेे इटली में ठगी करने वाले चाल्र्स पोंजी के नाम पर इस तरह की ठगी योजनाओं का नामकरण हुआ है।
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यह है अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम
अगर कोई डिपॉजिट टेकिंग स्कीम बिल में लिस्टेड रेगुलेटरों के पास रजिस्टर नहीं की गई है तो उसे अनरेगुलेटेड माना जाता है। आरबीआई से बिना रजिस्टर्ड कराए बैंकिंग करने वाली कंपनी या संस्था भी इस दायरे में आती है।
Published on:
22 Dec 2019 09:05 pm
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