20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाएं बात करने से भी डरती थीं, आज खुद का रोजगार चला रहीं

पेशे से लॉयर हार्दिका गुरबक्सनी कुकरेजा ने महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर

2 min read
Google source verification
dilli.jpg

भोपाल। मेरी मम्मी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम करती हैं। बचपन से मैं उनके साथ विभिन्न कार्यक्रमों में जाती थी तो पीडि़त महिलाओं को देख मुझे भी लगता था कि मुझे भी इनके लिए कुछ करना चाहिए। मैंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज से लॉ में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इन दिनों दिल्ली में हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हूं। यहां प्रैक्टिस के दौरान भी मैंने पीडि़त महिलाओं को देखा तो पिछले साल दिसंबर में उनके लिए काम करने का फैसला लिया। वर्कशॉप के जरिए उन्हें नई स्किल्स सिखाकर 40 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में मदद कर चुकी हूं। यह कहना है हार्दिका गुरबक्सनी कुकरेजा का। वे इन दिनों दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं।

वर्कशॉप कराने का फैसला लिया

हार्दिका का कहना है कि मैं पीड़िताओं से शिकायत करने के लिए कहती थी तो वे बताती थीं कि वे आर्थिक और सामाजिक रूप से सक्षम नहीं है। मैं उनकी लीगल मदद तो खुद कर सकती थी, तब मैंने ऐसी महिलाओं के लिए विशेषज्ञों से वर्कशॉप कराने का फैसला लिया। धीरे-धीरे ऐसी महिलाएं भी जुड़ने लगीं जिनके पति की कोविड में मौत हो गई या जिनके पति की आय कम थी। इसके बाद मैंने अनाथ बच्चियों को भी जोड़ा, ताकि वे हुनर सीख अपने भविष्य को सुनहरा बना सके।

40 महिलाओं को दिलाई ट्रेनिंग

हार्दिका ने बताया कि मैंने इन महिलाओं को हैंडीक्राफ्ट की ट्रेनिंग दिलाई। अधिकांश महिलाएं ऐसी हैं जो किसी से बात करने तक से डरती थीं। घरेलू हिंसा के चलते वे सदमे में थी। मैंने उनकी काउंसिलिंग कराई तो धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास लौटने लगा। जो महिला पहले अकेले घर से निकलने में भी डरती थीं, आज वे 10 से 15 हजार रुपए प्रतिमाह कमाकर खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं। हार्दिका ने बताया कि मुझे कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से सीड फंडिंग मिली हुई है। मैं हार्मटिन चेंजमैकर की ब्रांड एम्बेसडर भी हूं। इन महिलाओं के उत्पादों को मार्केट उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न राज्यों में लगने वाले मेलों में इन्हें पहुंचाती हूं।