
World Bank will give 551 crore rupees for the repair of 27 old dams of MP
dams of MP - मध्यप्रदेश में लगातार गिर रहे भू-जल स्तर को बढ़ाने, पेयजल संकट को दूर करने और सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई योजनाएं चालू की जा रहीं हैं। इनमें केन-बेतवा लिंक परियोजना जैसी महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय योजना भी शामिल है। 44 हजार 605 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के पूर्ण होने पर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र के 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी वहीं 44 लाख लोगों को पीने का पानी भी मुहैया हो सकेगा। प्रोजेक्ट में केन नदी पर दौधन बांध बनाया जाना है। इसके साथ ही प्रदेश में पुराने बांधों की सुरक्षा पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए खासतौर पर आर्थिक सहयोग के लिए विश्व बैंक से करार किया गया है।
केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना में केन नदी पर दौधन बांध और लिंक नहर का निर्माण किया जाएगा। परियोजना के साकार रूप लेने के बाद मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की तस्वीर बदल जाएगी। इलाके के औद्योगीकरण और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा निवेश से रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय लोग आत्मनिर्भर बनेंगे तथा पलायन रुकेगा।
केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना से से सूखाग्रस्त बुंदेलखंड में भू-जल की स्थिति सुधरेगी। 103 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होगा। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के 10 जिलों-छतरपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा एवं सागर के लाखों लोगों को लाभ मिलेगा। 2 हजार गांवों के करीब 7 लाख 25 हजार किसान परिवारों को सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।
बुंदेलखंड क्षेत्र में "अटल भू-जल योजना" भी प्रारंभ की गई है। प्रदेश के 6 जिलों के 9 विकासखंडों में क्रियान्वित की जा रही इस परियोजना से भू-जल स्तर में सुधार होने से किसानों को लाभ होगा, उनकी आय बढ़ेगी।
एमपी में बांधों की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। प्रदेश के दो दर्जन से ज्यादा बांधों को मरम्मत की दरकार है। बांधों की सुरक्षा के लिए प्रदेश में "डैम सेफ्टी रिव्यू पेनल" गठित किया गया है। यह पेनल हर साल संवेदनशील बांधों का निरीक्षण कर उनकी सुरक्षा की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।
मध्यप्रदेश में 27 पुराने बांधों की सुरक्षा और मरम्मत के लिए प्लान बनाया गया है। इसके लिए विश्व बैंक का सहयोग लिया जा रहा है। 551 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत हो चुकी है। अधिकारियोें के अनुसार आने वाले 5 सालों में इन बांधों की मरम्मत की जाएगी।
Updated on:
24 Mar 2025 09:38 pm
Published on:
24 Mar 2025 09:24 pm
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