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भारत में चॉकलेट बाजार मोंडेलेज, फेरेरो, नेस्ले, मार्स और अमूल से पटा लेकिन लोगों पसंद है तो केवल हैंडमेड ऑर्गेनिक चॉकलेट

- देश में मध्यम वर्ग की आय बढऩे, कंपनियों के वितरण में सुधार और स्वदेशी ब्रांड आने से शहरों से लेकर अंचल तक चॉकलेट की बढ़ी खपत - प्रति व्यक्ति आधार पर भारतीय प्रति वर्ष खाते हैं लगभग 120 ग्राम चॉकलेट - देश का विशाल बाजार विदेशी चॉकलेट निर्माताओं को कर रहा आकर्षित

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भोपाल. भारत में चॉकलेट बाजार का आकार वर्ष 2022 में 2.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, लेकिन अभी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबले यहां प्रति व्यक्ति खपत कम है। प्रति व्यक्ति आधार पर भारतीय प्रति वर्ष लगभग 120 ग्राम चॉकलेट खाते हैं। यह उभरते बाजारों में सबसे कम है और विकसित देशों की तुलना में दस गुना कम है, लेकिन बाजार का विशाल आकार देश को चॉकलेट निर्माताओं के लिए आकर्षक बनाता है। इसलिए यह ओपन मार्केट है। अभी विदेशी चॉकलेट निर्माता कंपनियों का बोलबाला है, हालांकि कुछ राज्यों में स्वदेशी ब्रांड भी ऑनलाइन और अपने स्टूडियो के माध्यम से जबरदस्त काम कर रहे हंै। ऐसे में महिलाओं या घरों से भी इसका बिजनेस काफी चल रहा है। उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2028 तक बाजार 4.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा, जो 2023-2028 के दौरान 8.8 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक विकास दर यानी कम्पाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) प्रदर्शित करेगा। देश में मध्यम वर्ग की आय बढऩे और चॉकलेट की वितरण व्यवस्था में विस्तार के कारण, ग्रामीण और शहरी दोनों भारत में चॉकलेट की खपत बढ़ रही है। वर्ष 2016 में भारत में अनुमानित 228 हजार टन चॉकलेट कन्फेक्शनरी की खपत हुई, जो वर्ष 2011 में खपत 152 हजार टन से 50 प्रतिशत अधिक है।

25 से 35 आयु वर्ग के युवा बड़ा कारण चॉकलेट मार्केट बढऩे का
देश में अब केवल विशेष अवसरों के बजाय रोजमर्रा के उपभोग के लिए आम लोग चॉकलेट खरीद रहे हैं। चॉकलेट उद्योग को चलाने वाला एक अन्य प्रमुख कारक देश की बड़ी युवा आबादी है जो चॉकलेट के लिए एक प्रमुख उपभोक्ता वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है। वर्तमान में भारत में कुल जनसंख्या का लगभग आधा हिस्सा 25 वर्ष से कम आयु का है और दो तिहाई 35 वर्ष से कम आयु के हैं। बाजार को चलाने वाले अन्य कारकों में बदलती जीवनशैली, पश्चिमीकरण, खाद्य सेवा क्षेत्र की वृद्धि, मूल्य संवर्धन आदि शामिल हैं।

मिल्क चॉकलेट सबसे लोकप्रिय, बाजार में 75 प्रतिशत की हिस्सेदारी
भारत में चॉकलेट बाजार मोंडेलेज, फेरेरो, नेस्ले, मार्स और अमूल जैसी अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय कंपनियों चॉकलेट निर्माण कर रही हैं। देश में तीन प्रमुख प्रकार यानी मिल्क चॉकलेट, वाइट चॉकलेट और डार्क चॉकलेट है। मिल्क चॉकलेट सबसे लोकप्रिय है, जिसकी कुल बिक्री में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी है, इसके बाद वॉइट चॉकलेट 16 प्रतिशत और डार्क चॉकलेट 9 प्रतिशत की खपत है।
मिल्क चॉकलेट-
इसमें कम से कम 12 प्रतिशत दूध होता है। कम से कम 10 प्रतिशत चॉकलेट लिकर, शुद्ध कोकोआ मक्खन और कोको ठोस होना चाहिए, हालांकि उच्च गुणवत्ता वाली दूध चॉकलेट में 30-40 प्रतिशत तक होता है कोको। बाकी में चीनी और कभी-कभी वेनिला या इमल्सीफायर शामिल होते हैं।
सफेद चॉकलेट-
यह शुद्ध कोकोआ मक्खन और चीनी से बनती है। इसमें कम से कम 20 प्रतिशत कोकोआ मक्खन और 14 प्रतिशत दूध, क्रीम, या दूध के ठोस पदार्थ हैं। अक्सर इसमें वेनिला मिलाया जाता है।
डार्क चॉकलेट-
ऐसी चॉकलेट जिसमें कम से कम 35 प्रतिशत चॉकलेट लिकर हो उसे डार्क चॉकलेट कहा जा सकता है। डार्क चॉकलेट बिना दूध के ठोस पदार्थ मिलाई गई चॉकलेट है। डार्क चॉकलेट बार में मूल सामग्री कोको बीन्स, चीनी और स्वाद के लिए सोया लेसिथिन जैसा इमल्सीफायर होता है।