
विश्व स्तरीय हैं ज्ञान चतुर्वेदी के उपन्यास : प्रभु जोशी
भोपाल। हिंदी भवन के महादेवी वर्मा सभागार में रविवार को सुविख्यात साहित्यकारों की उपस्थिति में हुए एक कार्यक्रम में डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी को लमही पत्रिका की ओर से सम्मानित किया गया। उन्हें प्रशस्ति पत्र के साथ, स्मृति चिन्ह एवं 15 हजार रुपए की सम्मान राशि भेंट की गई। इसी अवसर पर व्यंग्य लेखक समिति की ओर से स्थापित दूसरा ज्ञान चतुर्वेदी व्यंग्य साहित्य वरिष्ठ व्यंग्यकार शांन्तिलाल जैन को दिया गया। उन्हें पुरस्कार राशि 11 हजार रुपए के साथ सम्मान पत्र दिया गया।
इस अवसर पर प्रख्यात साहित्यकार, विचारक तथा चित्रकार प्रभु जोशी ने कहा कि ज्ञान चतुर्वेदी का लेखन पाठकों के लिये बहुत बड़ी उपलब्धि है। उनके उपन्यास, विशेष रूप से नव प्रकाशित पागलखाना विश्वस्तरीय श्रेणी का है। कथाकार पंकज सुबीर ने ज्ञान चतुर्वेदी के लेखन को नई पीढ़ी के लिये प्रकाश स्तम्भ बताया। कहानीकार एवं दूरदर्शन के पूर्व निदेशक शशांक ने व्यंग्य के स्थापित हस्ताक्षरों के साथ ज्ञान चतुर्वेदी के व्यंग्य लेखन की तुलना करते हुए उनकी शैली तथा विषय चयन की अपार विविधताओं को रेखांकित किया। लमही के सम्पादक विजय राय ने लमही के ज्ञान चतुर्वेदी केंद्रित व्यंग्य विशेषांक के विषय में प्रकाश डाला।
व्यंग्य की लोकप्रियता बनाए रखती हैं शांन्तिलाल की रचनाएं
आलोक पुराणिक ने शांन्तिलाल जैन की रचनात्मकता का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यंग्यकारों की भीड़ में उनकी रचनाएं व्यंग्य की लोकप्रियता बनाए रखने के प्रति आश्वस्त करती हैं। दिल्ली के व्यंग्यकार अनूप शुक्ला ने शांति लाल के संकलन में से प्रमुख अंशों का उल्लेख किया। समीक्षक राहुल देव ने व्यंग्य सम्मान के लिये शांन्तिलाल जैन को सर्वश्रेष्ठ बताया। उन्होंने कहा कि समकालीन व्यंग्यकारों में शांन्तिलाल के व्यंग्य अलग ही पहचान स्थापित करने में सफल रहे हैं। कार्यक्रम में व्यंग्यकार सुशील सिद्धार्थ का स्मरण कर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर गहन विमर्श किया गया। उनकी पत्नी आशा सिद्धार्थ ने संस्मरणों के साथ उनकी रचना का पाठ भी किया। आयोजन के अंतिम सत्र में देश के कई राज्यों से आए व्यंग्यकारों ने अपने व्यंग्यों का पाठ किया।
Published on:
15 Oct 2018 04:17 pm
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