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वर्ल्ड फेमस है यहां की होली, एक ही राज्य में दिखते हैं अलग-अलग रंग

अगर आप मध्य प्रदेश की होली देखना चाहते हैं तो मध्यप्रदेश के कई इलाकों में जा सकते हैं...। यहां का होली फेस्टिवल यूनेस्को में भी शामिल है।

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भोपाल

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Nisha Rani

Feb 20, 2024

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होली का उत्सव पूरे देश में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश में इसकी धूम सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। अगर आप मध्य प्रदेश की होली देखना चाहते हैं तो मध्यप्रदेश के कई इलाकों में जा सकते हैं...। यहां का होली फेस्टिवल यूनेस्को में भी शामिल है।

patrika.com पर जानिए मध्यप्रदेश की होली, जिसमें हैं कई तरह के रंग...।

रंगों का त्योहार होली आने वाला है। होली मध्यप्रदेश में पांच दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है। लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर अपने मतभेद दूर करते हैं। सबसे ज्यादा लोग इन दिनों इवेंट का हिस्सा बनना पसंद करते हैं। यही कारण है कि होली को अलग अंदाज में मनाने के लिए देशी-विदेशी पर्यटक भी मध्यप्रदेश का रुख करते हैं।

ये है मध्यप्रदेश 5 जगह होली

भगोरिया उत्सव की धूम
यह आदिवासियों की होली है, जो झाबुआ-अलीराजपुर में मनाई जाती है। यह जीवन और प्रेम का उत्सव है जो संगीत, नृत्य और रंगों के साथ मनाया जाता है। इस दौरान आदिवासी मेले का आयोजन भी होता है, जिसमें हजारों आदिवासी नौजवान युवक-युवतियां सज-संवरकर पारंपरिक वस्त्रों में शिरकत करते हैं। यह उत्सव होली के साथ ही परिणय का भी होता है। इसी दिन यहां आदिवासियों में रिश्ता तय करने का समय भी होता है।

यूनेस्को में शामिल है इंदौर की रंगपंचमी
मध्‍यप्रदेश के इंदौर शहर की रंगपंचमी तो विश्‍व प्रसिद्ध है। वैसे धुरेंडी के दिन और रंगपंचमी के दिन होली ज्यादा खेली जाती है, लेकिन रंगपंचमी वाले दिन यहां गेर निकालने की परंपरा है। यह एक प्रकार का जुलूस होता है जिसमें लाखों लोग उमड़ पड़ते हैं। सभी लोग रंगों से सराबोर होते हैं, पूरा ही शहर इन पर रंग डालता है। नगर निगम की तरफ से भी खास इंतजाम किए जाते हैं। आलम यह होता है कि जमीं तो जमीं आसमान भी गुलाबी हो जाता है। इसकी लोकप्रियता इतनी है कि यहां की गेर को यूनेस्को की विश्व सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करने के प्रयास किए गए हैं।

सिंधिया राजपरिवार की होली
ग्वालियर के सिंधिया राजपरिवार की होली भी काफी प्रसिद्ध है। यहां तत्कालीन राजा जीवाजी राव सिंधिया इसे धूमधाम से और राजसी ठाट से मनाते थे। वे एक उत्सव प्रेमी राजा थे, वे यहां पर अपने पूरे राज परिवार व मित्रों के साथ होली से एक दिन मौजूद रहते थे। इस दौरान नृत्य, गायन, वादन आदि कई प्रकार के आयोजन भी किए जाते थे। जो होली के 5 दिन तक चलते थे। इतना ही नहीं यहां पर उस समय हाथियों व घोड़ों के माध्यम से गाड़ियां भर-भर के गुलाल व रंग लाया जाता था। यह उत्सव काफी सौंदर्यपूर्ण होता था। इसकी झलक आज भी ग्वालियर में देखने को मिलती है।

होली पर करते हैं मेघनाद की पूजा
निमाड़ अंचल में बड़ी संख्या में गोंड आदिवासी रहते हैं। खंडवा जिले के ही खालवा ब्लाक में सबसे ज्यादा इनकी आबादी है। यह लोग पारंपरिक अंदाज में होली उत्सव मनाते हैं। यह लोग मेघनाद की पूजा करते हैं।इस दरान मेले का भी आयोजन कर इस पर्व पर खुशी व्यक्त की जाती है। इस दौरान झंडा दौड़ प्रतियोगिता और बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है।

अंगारेवाली होली
रायसेन होली जिले के दो गांवों में अनोखे तरह से होली मनाई जाती है। होली मनाने की परंपरा ग्राम चंद्रपुरा में और ग्राम मेंहगवा में वर्षों पुरानी है। होलिका दहन से रंग पंचमी तक परंपरा का निर्वहन किया जाता है, जहां आग के अंगारों पर चलकर होली खेली जाती है। नाबालिग बच्चों से लेकर महिलाएं और उम्र दराज बुजुर्ग तक आयोजन में हिस्सा लेते हैं। इस होली को देखने के लिए भी कई पर्यटक पहुंचते हैं।