
भोपाल. धार जिले के बाग में बनने वाले देश के अनोखे डायनोसोर फॉसिल्स नेशनल पार्क को लेकर सरकार एक कदम ओर आगे बढ़ चुकी है। राज्य इकोपर्यटन विकास बोर्ड ने इसे लेकर कॉन्सेप्ट डॉक्यूमेंट तैयार किया है। इसके तहत पार्क 89.4 हेक्टेयर में विकसित किया जाएगा। इसे तैयार करने की लागत करीब 200 करोड़ होगी। यहां पृथ्वी की उतप्ति से लेकर डायनोसोर के जीवन, आदिमानव तक के जीवन को दिखाया जाएगा।
पार्क की कुछ ऐसी होगी एंट्री
पार्क के मुख्य गेट की कुछ इस तरह परिकल्पना की गई है जिसमें जीवाश्मों से संबंधित सभी बड़े जीवों, मौजूदा-जीवाश्मित वनस्पति व जंतु और स्ट्राटीग्राफ होंगे। इसमें कुछ की उपस्थिति वास्तविक जैसे होगी तो कुछ फाइबर रेप्लिका तैयार की जाएगी। गेट के एक ओर फाइबर से उल्कापिंड तैयार किया जाएगा, जो ये दर्शाएगा कि पृथ्वी पर इसके गिरने के बाद डायनासोर का अस्तित्व खत्म हो गया। इसमें टायरानोसौरस की बड़ी सी रेप्लिका भी होगी।
ऐसी होंगी 7 टनल
यहां इकोफ्रेंडली इमारत तैयार की जाएगी, साथ ही थ्री डी ऑडियो विजुअल के जरिए 7 टनलों में अलग-अलग कालखंड के इकोसिस्टम की जानकारी होगी। जीवाश्मों के पास लगे क्यूआर कोड के स्कैन करते ही दर्शकों को वर्चुअल रिअलिटी द्वारा या उनके मोबाइल पर यहां के खूंखार शॉर्क, गगनचुम्बी वृक्ष जीवाश्मों, पर्वताकार डायनासोर और आदिमानवों को उसी स्थान पर महसूस किया जा सकेगा जिस स्थान पर उनके जीवाश्म मिले। टनल में दर्शकों को ऐसा लगेगा जैसे वे उनके बीच से होकर गुजर रहे हैं। हर एक टनल, कोई एक काल का टाइम ट्रैवल कराएगी। उदाहरण के तौर पर दकन ज्वालामुखीय उद्गार कितने भयावह थे, टेथिस समुद्र की वह भुजा कितने विविध जीवों से सम्पन्न थी या बड़े बड़े अंडे देते टाइटेनोसौर कैसे दिखते होंगे। । एक टनल में आदिमानव से मानव बनने की जानकारी होगी।
इस भूभाग पर था समुद्र
बोर्ड की सीइओ डॉ. समिता राजौरा ने बताया कि यहां कई ऐसे जंतुओं और वनस्पतियों के जीवाश्म मिले हैं जो युगों पूर्व भारत का सम्बंध मेडागास्कर, आस्ट्रेलिया और अफ्रीका तक से जोड़ते हैं। ट्यूरोनियन काल में ये भूभाग समुद्र का हिस्सा हुआ करता था। यहां मान नदी घाटी में विलुप्त 6 तरह की शॉर्क के दांतों के अवशेष भी मिल चुके हैं और कई पर अनुसंधान जारी है। इससे भी पूर्व के युग के मगरमच्छनुमा जीव के कंकाल के हिस्से भी मिले हैं। अन्य वैज्ञानिकों को मांसाहारी डायनासोर के 6.50 करोड़ साल पुराने अंडे भी मिले है। पार्क भूमि की चट्टानों में इस बात के भी प्रमाण मिले हैं कि वे यहां कई बार अंडे देने आते रहे और उस समय की भूमि उनके अंडे देने के सर्वथा अनुकूल और सुरक्षित थी।
पंचतत्व को कर सकेंगे महसूस
यहां नर्मदा जीवाश्म विहार, लिथो लैब भी होगी। लिथो लैब जमीन में धंसे एक उल्कापिंड सी प्रतीत होगी। अर्थ कॉम्प्लेक्स में भारत की सबसे पुरानी चट्टानों,बड़े रत्नों, कालसूचक चट्टानों की सवारी कर सकेंगे। कुछ पत्थर चोट करते ही संगीत के सुर या ॐ आदि लोकप्रिय ध्वनियां उत्पन्न करने लगेंगे। प्रथम चरण में ओपन म्यूजियम बनाया जाना नियोजित है। साथ ही कॉन्सेप्ट डॉक्यूमेंट में 10 तरह वन क्षेत्र भी विकसीत करने की योजना तैयार की गई है।
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Published on:
09 Mar 2023 10:23 pm
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