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तस्वीरें हमेशा जिंदा रहती हैं, जानिए क्यों मनाया जाता है World Photography Day

World Photography Day History : हर साल 19 अगस्त को यानी आज वर्ल्ड फोटोग्राफी डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के पीछे एक बड़ी ही रोचक कहानी है।

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तस्वीरें हमेशा जिंदा रहती हैं, जानिए क्यों मनाया जाता है World Photography Day

भोपालः हर जानदार एक ना एक दिन मौत को आगौश में चला ही जाता है। लेकिन, तस्वीरें हमेशा जिंदा रहती हैं। कहते हैं, किसी पल को अमर करना हो तो उसे तस्वीरों में कैद कर लो। चूंकि कभी भी लम्हे कैद नहीं कर सकते, लेकिन ख्वाहिश रहती है कि काश ये किसी किताब के पन्ने की तरह होते, जिन्हें जब चाहें पलटकर देख लें। इंसान की इन्हीं इच्छाओं को आकार देने के लिए फोटोग्राफी तकनीक एक वरदान के रूप में देखा गया।


जीवन में चित्र की भूमिका

एमपी के प्रसिद्ध फोटोग्राफरों में से एक नेचर फोटोग्राफी में महारथी मनीष गीते ने बताया कि, पहले के जमाने में जब कोई तकनीक ना होने के कारण इंसान के पास किसी तरह के हाईटेक कैमरे नहीं थे, तब भी वह तस्वीरें उकेरा करता था। प्राचीन गुफाओं में बनाए गए भित्तीय चित्र इस बात के गवाही देते हैं। इन चित्रकारियों के ज़रिये वो आने वाली पीढ़ियों के लिए कितनी बेश्कीमती सौगात छोड़ गए हैं। बाद में जब कैमरे का आविष्कार हुआ, तो फोटोग्राफी भी इंसान के लिए अपनी रचनात्मकता को प्रदर्शित करने का जरिया बन गया।

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वर्ल्ड फोटोग्राफी डे का इतिहास

हर साल 19 अगस्त को यानी आज वर्ल्ड फोटोग्राफी डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के पीछे एक बड़ी ही रोचक कहानी है। दरअसल, साल 1839 में सबसे पहले फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुईस जेकस और मेंडे डाग्युरे ने फोटो तत्व को खोजने का दावा किया था। ब्रिटिश वैज्ञानिक विलियम हेनरी फॉक्सटेल बोट ने नेगेटिव-पॉजीटिव प्रोसेस ढूंढ लिया था। 1834 में टेल बॉट ने लाइट सेंसेटिव पेपर का आविष्कार कर दिया था, जिससे खींचे चित्र को स्थायी रूप में रखने की सुविधा मिली थी। फ्रांसीसी वैज्ञानिक आर्गो ने 7 जनवरी 1839 को फ्रेंच अकादमी ऑफ साइंस के लिए एक रिपोर्ट तैयार की। फ्रांस सरकार ने यह प्रोसेस रिपोर्ट खरीदकर उसे आम लोगों के लिए 19 अगस्त 1939 को फ्री में घोषित कर दिया था। यही कारण है कि, हर साल 19 अगस्त को विश्व फोटोग्राफी दिवस के रूप में मनाया जाता है।


आवश्यक्ता बनी आविष्कार का कारण

इनसान हो या जानवर इस संसार में बसने वाला लगभग हर प्राणी जन्म के साथ भी एक कैमरा लेकर दुनिया में आता है। इसी कैमरे के माध्यम से इंसान संंसार की हर एक चीज़ को अपने दिमाग में अंकित करता रहता है। ये कैमरा कुछ और नहीं हमारी आखें हैं। इस हिसाब से देखें तो लगभग हर इंसान प्रत्येक प्राणी एक फोटोग्राफर है। जैसे जैसे विज्ञानिक तरक्की होती गई, वैसे वैसे मनुष्य भी अपने संसाधन बढ़ाने में लगा रहा। इन्हीं संसाधनों की आवश्यक्ताओं के कारण मनुष्य ने आविष्कार करते हुए कृत्रिम लैंस की इजाद कर दी। समय के साथ आगे बढ़ते हुए उसने इस लैंस से प्राप्त छवि को स्थायी रूप से सहेजने का प्रयास किया। इसी प्रयास में मिलने वाली सफलता के दिन को हम विश्व फोटोग्राफी दिवस के रूप में मनाते हैं।

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फोटोग्राफी का योगदान

फोटोग्राफी का आविष्कार जहां संसार को दूसरे संसार के करीब लाया, वहीं एक-दूसरे को जानने, संस्कृति और इतिहास को समृद्ध बनाने में भी बड़ा योगदान दिया है। आज हमें संसार के किसी दूरस्थ कोने में स्थित द्वीप के जनजीवन की सचित्र जानकारी बड़ी आसानी से प्राप्त होती है, तो इसमें फोटोग्रोफी के योगदान को कम नहीं किया जा सकता। वैज्ञानिक और तकनीकी सफलता के साथ-साथ फोटोग्राफी ने भी आज तरक्की करते हुए बड़ा योगदान दिया है। आज व्यक्ति के पास ऐसे-ऐसे साधन मौजूद हैं जिसमें सिर्फ बटन दबाने की देर है और मिनटों में अच्छी से अच्छी तस्वीर उसके हाथों में होती है। किंतु सिर्फ अच्छे साधन ही अच्छी तस्वीर प्राप्त करने की ग्यारंटी दे सकते हैं, तो फिर मानव दिमाग का उपयोग क्यों करता?


अच्छे फोटो की शर्त

मनीष गीते ने बताया कि, आंख से दिखाई देने वाले दृश्य को कैमरे की मदद से फ्रेम करना, प्रकाश व छाया, कैमरे की स्थिति, ठीक एक्सपोजर तथा उचित विषय का चुनाव ही एक अच्छे फोटो को प्राप्त करने की पहली शर्त होती है। यही कारण है कि आज सभी के घरों में एक कैमरा होने के बाद भी अच्छी फोटोग्राफी कर पाना कम ही लोगों के बस की बात होती है। उन्होंने बताया कि 'हमें फ्रेम में क्या लेना है, इससे ज्यादा इस बात का ज्ञान जरूरी है कि हमें क्या-क्या छोड़ना है।'

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