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किस्सा कुछ यूं था: जेपी की पालकी उठाई तब गौर को मिला था आशीर्वाद

जनवरी 1975 में जयप्रकाश नारायण भोपाल से गुजरे तो हुई थी जनसभा...

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Dr. Harisingh Gouri University Search election

भोपाल। राजनीति में कुछ वाकये हमेशा चर्चा में रहते हैं। ऐसा ही एक वाकया उन दिनों नए-नए विधायक बने बाबूलाल गौर से जुड़ा है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण भोपाल आए तो गौर ने जेपी को पालकी पर बैठाकर स्टेशन की छत तक पहुंचाया और जनता को संबोधित करने में मदद की।

इसके बाद गौर का परिचय जैसे ही जेपी से करवाया गया तो उन्हें ऐसा आशीर्वाद मिला जो अभी तक चल रहा है। वरिष्ठ पत्रकार एवं माधवराव सप्रे संग्रहालय के संस्थापक विजयदत्त श्रीधर बताते हैं कि जनवरी 1975 में जयप्रकाश नारायण ने देशव्यापी आंदोलन छेड़ा था।

उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता था कि जहां से जेपी गुजरते थे, वहां जनसमूह उमड़ता था। गुजरात से लौटते समय जेपी भोपाल से होकर गुजरे तो स्टेशन पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई।

यहां मंच की कोई व्यवस्था नहीं थी तो स्टेशन की छत से जनता को संबोधित करने की व्यवस्था की गई। छत तक जेपी को पहुंचाने के लिए कुर्सी को दो बांस के सहारे पालकी में तब्दील किया गया।

इस पर जेपी को बैठाकर छत तक लाया गया। बाबूलाल गौर एवं लक्ष्मीनारायण शर्मा ने पालकी को एक ओर से उठाया तो दूसरी ओर का हिस्सा गौरीशंकर कौशल व अन्य कार्यकर्ता ने संभाला।

सभा खत्म होने के बाद बाबूलाल गौर का परिचय जेपी से कराया। बताया कि विपक्ष के साझा उम्मीदवार के रूप में ये विधायक चुने गए हैं। जेपी ने गौर के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा कि जब तक रहोगे विधायक रहोगे। अभी तक ये आशीर्वाद बना हुआ है।

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लक्ष्मण रेखा : पुराने खातों से किया ट्रांजेक्शन तो दलों के पदाधिकारियों पर होगी कार्रवाई

जिला प्रशासन के बार-बार निर्देश देने के बाद भी पार्टी पदाधिकारी बैंक में नए खाते नहीं खुलवा रहे हैं। ऐसे में आचार संहिता की तलवार अभी से दलों के पदाधिकारियों पर लटकने लगी है। अधिकारियों का तर्क है कि अगर बैंक खाते देर से खुलवाए तो चेकबुक देर से आएगी।

ऐसे में लेन-देन संबंधी परेशानी बढ़ेगी। अभी तक एक- दो दलों को छोड़कर किसी ने नए खाते की जानकारी प्रशासन को नहीं दी है। यदि समय पर पदाधिकारी नहीं चेते और पुराने खातों से ट्रांजेक्शन किया तो ये आचार संहिता का उल्लंघन होगा।

पटियों पर चर्चा है...- ये लोग मुझे विधायक देखना चाहते हैं...
म ध्य सीट से भाजपा के नेताजी टिकट के लिए भोपाल से दिल्ली तक दौड़ लगा रहे हैं। कुछ दिन पहले राजधानी में उनके समाज का कार्यक्रम था, जिसमें शिरकत करने वाले लोगों को वे भाजपा कार्यालय लेकर पहुंच गए।

उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को बताया कि समाज के ये लोग मुझे विधायक के रूप में देखना चाहते हैं। इसके बाद इस सीट से दावेदारी कर रहे दूसरे नेता भी सोच में पड़ गए कि ये नेताजी तो पार्षद की दौड़ में भी नहीं थे।

पंडित हुआ गायब तो नेताजी टेंशन में
पी सीसी में बैठने वाले एक बड़े नेता इन दिनों खासे तनाव में हैं, बताया जा रहा है कि तीन दिन से उनके भरोसेमंद पंडित को किसी ने अन्य नेता ने अपने पक्ष में कर लिया है।

अब इन नेताजी को डर सता रहा है कि पंडितजी के पास उनके कई राज हैं, कहीं ऐसा न हो कि ये सार्वजनिक न हो जाएं। सूत्रों की मानें तो नेताजी ने अपने समर्थकों को पंडितजी की तलाश में लगा दिया है।

इधर, डोर-टू-डोर सर्वे में लापरवाही का नतीजा :फिर मिले डबल नाम वाले वोटर
तीन महीने से जारी वोटर लिस्ट की जांच के बाद भी डबल नाम वाले मतदाता बार-बार सामने आ जाते हैं। इसका मतलब साफ है कि डोर-टू-डोर सर्वे में कहीं न कहीं लापरवाही बरती जा गई है।

कांग्रेस की शिकायत पर जांच के बाद 597 वोटर्स के नाम डबल एंट्री के सामने आए हैं। इसके बाद निर्वाचन आयोग के सॉफ्टवेयर ने जिले की सातों विधानसभाओं से डबल एंट्री वाले 166 नाम चिह्नित किए हैं।

कुल 763 नामों को निर्वाचन आयोग की मंजूरी के बाद काटा जाएगा। सबसे ज्यादा गड़बड़ी नरेला विधानसभा में मिली है। वोटर लिस्ट के फाइनल प्रकाशन के समय नरेला विधानसभा में सबसे ज्यादा 16 हजार 440 नाम जोड़े गए थे।