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यमराज रिश्वत लेकर पापियों को भेज देते हैं स्वर्ग, जानिए कहानी में आगे क्या हुआ…

शहीद भवन में नाटक 'बूढ़ी काकी' और 'जर्नी टू यमलोक' का मंचन

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भोपाल। शहीद भवन में चल रहे दो दिवसीय युवा अनुनाद नाट्य समारोह के अंतिम दिन मंगलवार को दो नाटक 'बूढ़ी काकी' और 'जर्नी टू यमलोक' का मंचन किया गया। बूढ़ी काकी का नाट्यालेख और निर्देशन आयुषी गारवे और दीपक तोमर ने किया है। वहीं, जर्नी टू यमलोक का नाट्यालेख व निर्देशन क्षितिज शर्मा और रवि शर्मा का रहा। दोनों ही नाटक 45-45 मिनट अवधि के रहे, जिनमें पारिवारिक, सामाजिक व राजनीतिक समस्याओं को उजागर किया गया।
नाटक के निर्देशक क्षितिज ने बताया कि इस नाटक में हमने वेस्ट मटेरियल का यूज किया है। इसमें बोरियां, पेपर वेस्ट, कॉटन कपड़े, टेलर के यहां के वेस्ट कपड़े हैं। वेस्ट कपड़ों के माध्यम से हमने दिखाया कि नर्क कितना खतरनाक है और रंगीन कपड़ों से दिखाया कि स्वर्ग कितना खुशहाल है।

बूढ़ी काकी को खाना पड़ती है झूठन
नाटक बूढ़ी काकी मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास से प्रेरित है। इसकी कहानी बूढ़ी काकी के पति की बरसों पहले मौत हो चुकी है वहीं बेटा भी जवानी में काल का शिकार हो गया। अब काकी को बस एक ही शौक है अच्छे भोजन का। भतीजा बुद्धीराम जायजाद के लिए अपने घर लेकर आ जाता है। काकी जैसे ही जायजाद के पेपर पर हस्ताक्षर करती हैं, वैसे ही बुद्धीराम का रवैया बदल जाता है। वह काकी पर अत्याचार करने लगता है। उसे कमरे में बंद रखा जाता है। खाने-पीने को भी नहीं देते हैं। बुद्धीराम की बेटे मुखराम के तिलक कार्यक्रम में सभी मेहमान दावत का मजा ले रहे होते हैं। काकी भूख से तड़पती हुईं फंक्शन में पहुंच जाती हैं। बुद्धीराम की पत्नी रूपा मेहमानों का झूठा भोजन खाते देख पसीज जाती है। उसे अपनी गलती का एहसास होता है।

आम आदमी हो जाता है परेशान
नाटक जर्नी टू यमलोक में दो सूत्रधार हैं चंटू और बंटू है। नाटक में दिखाया गया कि आम आदमी किस तरह से हमेशा परेशान रहता है, जबकि भ्रष्टाचारी हमेशा मौज करते हैं। वे धन-दौलत की दम पर हर कार्य करवा लेते हैं। सड़क हादसे में शिक्षक बउआ की मौत हो जाती है। चंटू और बंटू उसे यमलोक लेकर पहुंचते हैं। ईमानदार होने के कारण उसके पास इतने पैसे नहीं होते कि वो यमराज को रिश्वत देकर स्वर्ग में एंट्री ले सके। इधर, एक एक्ट्रेस, नेता, चोर, बिजनेसमैन भी आते हैं। सभी भ्रष्ट्राचार कर स्वर्ग ले लेते हैं या धरती पर लौट आते हैं। वो यमराज से कहता है कि उसे जिंदगीभर बच्चों को नि:स्वार्थ भाव से पढ़ाया है, उसे स्वर्ग मिलना चाहिए। इधर, एक्ट्रेस यमराज को हनी ट्रेप में फंसा देती है। बउआ को नर्क ले जाया जाता है। जैसे ही दोनों धक्का मारते हैं बउआ की नींद खुल जाती है। अंत में वो भी कसम खाता है कि वह बईमानी का रास्ता चुनेगा।