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MP Assembly Election 2023: यशोधरा राजे सिंधिया की न के बाद क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया होंगे उम्मीदवार

यशोधरा राजे सिंधिया ने स्वास्थ्य कारणों से विधानसभा चुनाव लड़ने से मना किया है, अब नजरें भाजपा नेतृत्व पर हैं। कहा जा रहा है कि इस सीट से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को मैदान में उतारना चाहती है। ज्योतिरादित्य के सहारे शिवपुरी जिले में भाजपा की सीटों को सहारा मिलेगा, ऐसी रणनीति मानी जा रही है।

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yashodhra Raje Scindia

प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। अब सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर शिवपुरी सीट से भाजपा का उम्मीदवार कौन होगा। दरअसल, यशोधरा राजे सिंधिया इसी सीट से लगातार विधायक बनती रही हैं और वर्तमान में भी यहीं से टिकट की दावेदार भी मानी जा रही थीं। उनके अचानक इनकार के बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि भाजपा उनके भतीजे और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को शिवपुरी लेकर आ सकती है।

यशोधरा शिवपुरी विधानसभा सीट से विधायक है। यशोधरा के इंकार के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें इस मामले में फिर विचार करने की सलाह दी है, लेकिन फिलहाल वे चुनाव पर सहमत नहीं हैं। यशोधरा ने संगठन को पत्र लिखकर चुनाव में भागदौड़ से परेशानी की बात कही है। इस पत्र में 4 बार कोविड होने का जिक्र किया गया। यशोधरा ने बताया है कि वो बीते दिनों में 4 बार कोविड का शिकार हो चुकी हैं। शारीरिक तौर पर ज्यादा परिश्रम की स्थिति में नहीं हैं। चुनाव में लगातार भागदौड़ होने के कारण परेशानी बढ़ सकती है। इस वजह से वो चुनाव नहीं लड़ना चाहती। वह फिलहाल 5-6 महीने आराम करना चाहती हैं। मीडिया में यशोधरा के चुनाव न लड़ने की बात आने के बाद फिलहाल यशोधरा ने चुप्पी साध ली है। मामले में उन्हें पार्टी के फैसले का इंतजार है।

विधानसभा में ज्योतिरादित्य सिंधिया की एंट्री?
दरअसल, मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से भाजपा में आकर सत्ता परिवर्तन कराया था। इसके बाद से ही यशोधरा की सक्रियता में कुछ कमी देखी गई थी। यशोधरा अक्सर विभिन्न मुद्दों पर मुखर रही है, लेकिन वह लंबे समय से पार्टी में हाशिये पर रही हैं। इसके अलावा शिवपुरी जिले में भी स्थानीय राजनीति में उनकी नाराजगी रही है। बीते दिनों भाजपा विधायक वीरेंद्र रघुवंशी ने पार्टी छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी। इसके बाद वीरेंद्र रघुवंशी की शिवपुरी सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने का भी चर्चा रही है। इस बीच यशोधरा ने अब चुनाव लड़ने से इनकार किया है।

अब कौन?
यशोधरा के चुनाव न लड़ने की स्थिति में शिवपुरी सीट को बचाने को लेकर पार्टी के सामने उम्मीदवार चयन का संकट रहेगा। वजह यह कि यह सीट सिंधिया राजघराने के प्रभाव क्षेत्र में आती है। हालांकि यहां भाजपा मजबूत स्थिति में रही हैं। अब इसी कारण केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस सीट से चुनाव लड़ने की अटकलें भी शुरू हो गई है। भाजपा पूर्व में ही केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को दिल्ली सीट से उतार चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। यशोधरा के न के बाद से इस बात की संभावना और ज्यादा बन गई है कि बुआ की सीट पर भतीजा उम्मीदवार बनकर आ सकता है।

खेलों में मध्यप्रदेश को नया मुकाम दिया
यशोधरा राजे सिंधिया को मध्यप्रदेश में एक बेहतरीन नेता के तौर पर भी जाना जाता है, जिसने खेलों के लिए सबसे ज्यादा काम किया और मध्यप्रदेश को खेलों में एक नया मुकाम दिया। मध्यप्रदेश में उनके कार्यकाल में 52 के करीब खेल अकादमी खोले गए। अंतरराष्ट्रीय स्तर की अकादमी तैयार की गईं।

1998 से राजनीति में सक्रिय हैं यशोधरा
बीजेपी की संस्थापक सदस्य स्व. राजमाता सिंधिया की सबसे छोटी बेटी सबसे पहले 1998, फिर 2003 मे विधानसभा के लिये निर्वाचित हुई। 2007 में लोकसभा उपचुनाव के माध्यम से फिर 2009 के आम चुनाव में ग्वालियर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनी गई। उसके बाद 2013 से वे शिवपुरी निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा में चुनकर आई। शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में वे वाणिज्य उद्योग और रोजगार मंत्री के साथ-साथ खेल एवं युवक कल्याण, धार्मिक न्यास धर्मस्व मंत्री के पद भी संभाल चुकी हैं।