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घर में CCTV कैमरा लगवा रखा है तो ध्यान दें, पुलिस सर्वर से कर सकते हैं कनेक्ट, नहीं होगी चोरी-डकैती

-शहर के लोगों ने अपने निजी कैमरों को पुलिस के सर्वर से जोड़ा-पुलिस घटनास्थल चिन्हित करने के साथ अपराधियों की कर रही धरपकड़-पुलिस के लिए मुखबिर की तरह घर-प्रतिष्ठान के कैमरे, ट्रेस करने में भी अहम रोल
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CCTV camera

इंदौर। शहर में विभिन्न तरह के अपराधों पर लगाम कसने में सीसीटीवी कैमरे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अब ये कैमरे मुखबिर की तरह पुलिस को गुप्त सूचनाएं देने लगे हैं। विशेष प्लेटफॉर्म से जोड़े गए इन कैमरों की मदद से पुलिस घटनास्थल को चिन्हित करने के साथ अपराधियों की धरपकड़ कर रही है।

नए-नए हो रहे प्रयोग

पुलिस कमिश्रनरी लागू होने के बाद से चार जोन में बंटे शहर में अपराधों पर लगाम लगाने के लिए अधिकारी नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। बीते दिनों पुलिस ने सिटीजन कॉप ऐप में लोगों के लिए नया फीचर जोड़ा था। इसमें कोई भी व्यक्ति अपने घर, प्रतिष्ठान में सुरक्षा दृष्टि से लगे कैमरों को पुलिस सर्वर से जोड़ सकता है। दिसंबर 2022 से अब तक इस प्लेटफॉर्म पर हजारों लोग जुड़े हैं। अच्छी बात है यह है कि पुलिस के नेटवर्क में कैमरों की संख्या बढ़ती जा रही है। ये कैमरे मुखबिर के रूप में 24 घंटे काम कर रहे हैं।

लोकेशन और नंबर की मदद से घटनास्थल पर पहुंचेगी पुलिस

सिटीजन आई नेटवर्क से शहरभर में 10 हजार से अधिक कैमरों को जोड़ा है। इसका फायदा मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर स्कीम 74 में अपराध हुआ तो पुलिस सिटीजन आई तकनीक से संबंधित इलाके में पुलिस नेटवर्क से जुड़े कैमरों की जानकारी पलभर में हासिल कर सकेगी। कैमरे किन लोगों के यहां लगे हैं, उनकी लोकेशन क्या है, संबंधित व्यक्ति से फोन पर संपर्क कर इलाके की गतिविधियों का पता लगाया जा सकता है।

इन अपराधों को ट्रेस करने में मिली सफलता

-भंवरकुआं में ज्योतिषी के घर डकैती में फरार आरोपियों को पुलिस ने फुटेज के आधार पर पकड़ा था। उस समय पुलिस ने बेक ट्रेक तकनीक से आरोपियों की लोकेशन निकाली थी।

-छोटी ग्वालटोली थाना क्षेत्र में लोहा कारोबारी से लाखों की लूट में फरार बदमाशों को पकड़ा था।

1 लाख का डाटा एकत्रित करने का टारगेट

अफसरों की मानें तो सिटीजन कॉप फाउंडेशन ने सिटीजन आई तकनीक की शुरुआत की है। इस तकनीक से पुलिस पता लगा सकेगी कि घटनास्थल के आसपास कितने कैमरे लगे हैं। सिटीजन कॉप एडमिन पैनल के माध्यम से पुलिसकर्मी नेटवर्क से जुड़े कैमरों की जानकारी पता कर सकेंगे। खास बात है कि अपराध पर नियंत्रण के लिए लोगों के कैमरे पुलिस नेटवर्क से जुड़े हैं, लेकिन लोगों की निजी कैमरों की फीड कोई नहीं देख सकेगा।

बिना कैमरे से पुलिस जांच पड़ी थी धीमी

गौरतलब है कि बाणगंगा थाना क्षेत्र में फूड डिलीवरी बॉय से लूट और हत्या मामले की शुरुआती जांच में पुलिस घटनास्थल खोजती रही। कई घंटे गुजर जाने के बाद पुलिस घटनास्थल तक पहुंच सकी। जिस स्थान पर हमला हुआ वहां जुड़े मार्ग पर कैमरे नहीं थे।