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प्रदेश के युवा पढ़ेंगे अब गांधी दर्शन, विश्वविद्यालयों में स्थापित होगी शोध पीठ

- इंदौर विश्वविद्यालय में गुरुनानक पीठ  

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भोपाल

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Arun Tiwari

Dec 06, 2019

प्रदेश के युवा पढ़ेंगे अब गांधी दर्शन, विश्वविद्यालयों में स्थापित होगी शोध पीठ

प्रदेश के युवा पढ़ेंगे अब गांधी दर्शन, विश्वविद्यालयों में स्थापित होगी शोध पीठ

भोपाल : प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में गांधी शोध पीठ की स्थापना की जा रही है। शोध पीठ के जरिए प्रदेश के युवा गांधी दर्शन को जान सकेंगे। यहां पर गांधीवाद से लेकर गांधीगिरी तक का अध्ययन किया जा सकता है। गांधी से युवाओं को जोडऩे के लिए प्रदेश सरकार ये गांधी शोध पीठ की स्थापना कर रही है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 2 अक्टूबर को गांधी जयंति के मौके पर इसकी घोषणा की थी।

उच्च शिक्षा विभाग ने सभी कुल सचिवों को इसके आदेश जारी कर दिए हैं। सरकार ने ये फैसला तब लिया है जब देश में गांधी और गोडसे को लेकर सियासत गरमा रही है। गांधी के अलावा सरकार ने इंदौर के अहिल्याबाई विश्वविद्यालय में गुरुनानक पीठ खोलने के आदेश भी दे दिए हैं। यहां पर सिक्ख धर्म और गुरुनानक पर शोध कार्य किए जाएंगे।

इस तरह होगी गांधी शोध पीठ :

गांधी शोध पीठ में महत्मा गांधी के जीवन,उनके दर्शन,आंदोलन,सहित्य पर शोध और अध्ययन किया जाएगा। अध्ययन केंद्र पीठ में मोहनदास से महात्मा बनने तक की यात्रा सारे तथ्यों और तर्कों के साथ उपलब्ध रहेगी। महात्मा गांधी पर न केवल शोध किए जाएंगे, बल्कि यहां महात्मा गांधी पर लिखी गई किताबें, महत्वपूर्ण लेख भी मौजूद रहेंगे। इस शोध पीठ से ये बात पुख्ता होगी कि गांधी आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

महात्मा गांधी शोध अध्ययन केंद्र पीठ में महत्मा गांधी के साथ ही उनकी धर्मपत्नी कस्तूरबा गांधी के जीवन को लेकर भी अध्ययन होगा। शोध पीठ के माध्यम से महात्मा गांधी के विचार, दर्शन और उनके कार्यों पर शोध किया जायेगा एवं उनके विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए संगोष्ठी, व्याख्यान जैसे कार्य किए जायेंगे। डॉ बीआर अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय महू में प्रदेश के पहले महात्मा गांधी शोध अध्ययन केंद्र पीठ की स्थापना की गई है।


- सरकार ने गांधी जयंति पर 2 अक्टूबर को विश्वविद्यालयों में गांधी शोध पीठ बनाने की घोषणा की थी। सरकार ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। गांधी के दर्शन को जानना आज के युवाओं के लिए बहुत आवश्यक है। इस शोध पीठ में उनको गांधी से जुड़ा तमाम साहित्य मिलेगा। यहां पर वे अध्ययन भी कर सकते हैं और शोध भी कर सकेंगे। गांधी आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। - जीतू पटवारी उच्चशिक्षा मंत्री,मप्र -