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फॉर्मेट और नाम के साथ री-लॉन्च किया जायेगा युवा स्वाभिमान योजना, सीएम ने दिया ये निर्देश

yuva swabhiman yojana 2019: युवा स्वाभिमान योजना अब नए नाम और फॉर्मेट में आएगी, सीएम ने लौटाए नगरीय प्रशासन के प्रस्ताव: कहा- जॉब ओरिएंटेड ट्रेनिंग देने पर करें फोकस

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yuva swabhiman yojana

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भोपाल. प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री युवा स्वाभिमान योजना को नए फॉर्मेट और नाम के साथ री-लॉन्च किया जाएगा। अभी कई अव्यवहारिक शर्तों के कारण युवा पंजीयन के बाद ट्रेनिंग छोड़ रहे हैं। वहीं, कई ट्रेड ऐसी हैं, जिनमें ट्रेनिंग के बाद भी रोजगार की संभावना नहीं है।

राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने गुरुवार को इस योजना में बदलाव पर विचार किया। मंत्रियों ने योजना को आगे संचालित करने के लिए तीन मॉडल सुझाए, लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उन्हें लौटाते हुए नए सिरे से फॉर्मेट बनाने के लिए कहा है। उन्होंने कहा जॉब ओरिएंटेड टे्रनिंग दें।

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इसलिए फेल
इस योजना को नगर निगम, आइटी विभाग और कौशल विभाग मिलकर संचालित कर रहे हैं। तीनों में को-आर्डिनेशन नहीं होने से कई खामियां सामने आई हैं। अभी तक 2.80 लाख युवाओं को ट्रेनिंग दी गई हैं। इसमें से महज 18 हजार को ही स्टाइपेंड दिया गया है।

योजना में चार घंटे ट्रेनिंग और उसके साथ चार घंटे काम का नियम है, ऐसे में युवा अपने कॉलेज की पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। इस तरह कई दिक्कतें युवाओं के सामने खड़ी हैं।


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बदलाव के तीन मॉडल

पहले मॉडल में स्किल डवलपमेंट के साथ चार घंटे युवाओं से काम कराया जाए। इसमें तीनों विभाग शामिल रहें। मुख्यमंत्री ने इसे खारिज कर दिया। दूसरा सुझाव दिया गया कि योजना से स्किल डवलपमेंट को हटा दिया जाए। नगरीय निकाय में चार घंटे ट्रेनिंग के साथ काम कराया जाए। यह मॉडल भी नामंजूर किया गया। तीसरा मॉडल है कि निकाय को हटा दिया जाए। स्किल डवलपमेंट विभाग ट्रेनिंग दे। मुख्यमंत्री ने इसे विकसित करने के लिए कहा है।

इसलिए बदलना चाहते हैं नाम

युवा स्वाभिमान योजना का नाम भी सरकार बदलना चाहती है। इसके पीछे यही कारण है कि इस नाम से बनी योजना प्रदेश के युवाओं को पसंद नहीं आई है। अगर सिर्फ योजना का फॉर्मेट बदला गया और नाम नहीं बदला तो युवा इस योजना से दूरी बनाए रखेंगे।


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181 निकायों में भी होंगे कौशल विकास केंद्र

प्रदेश में 166 निकायों में प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। कौशल विभाग ने अभी तक 180 निकायों में अभी तक युवाओं को ट्रेनिंग सेंटर का चयन नहीं कर पाया है। जिन निकायों में ट्रेनिंग सेंटर का चयन किया गया है, वहां पर्याप्त मात्रा में ट्रेड नहीं हैं। सबसे ज्यादा युवा डाटा इंट्री ऑपरेटर की मांग कर रहे हैं, लेकिन टे्रनिंग सेंटर उन्हें वह ट्रेड उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। बताया जाता है कि अभी तक 4.17 लाख युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

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