
अल्जाइमर: जम्मू-कश्मीर के बाद ओडिशा में सबसे अधिक हैं मरीज
खतरे का संकेत दे रही है बीमारी
भुवनेश्वर. अल्जाइमर या डिमेंशिया बीमारी देश के साथ ओडिशा में तेजी से पांव पसार रही है। जम्मू-कश्मीर के बाद ओडिशा में इसके सबसे अधिक मरीज हैं। याददाश्त खोने की इस बीमारी का कोई कारगर इलाज नहीं है। इसके मरीजों की देखभाल एक मात्र उपाय है। योगासन और नियमित अभ्यास से इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। ऐसे मरीजों की देखभाल के लिए दक्षिण कोलकाता में अल्जाइमर्स एण्ड रिलेटेड डिसऑर्डर सोसाइटी ऑफ इंडिया (एआरडीएसआई) का सिर्फ एक डेकेयर केन्द्र है। इस गैर सरकारी संगठन के कोलकाता चैप्टर की सचिव नीलांजला मौलिक ने बताया कि बंगाल में अल्जाइमर मरीजों के लिए क्लिनिक तो है, लेकिन देखरेख के लिए राज्य सरकार की ओर से कोई व्यवस्था नहीं हैं और न ही सरकारी अस्पतालों में इनके लिए अलग वार्ड है। हम अपने केन्द्र में सप्ताह में छह दिन 15 से 20 अल्जाइमर मरीजों की देख-भाल करते हैं। कुछ अन्य एनजीओ अन्य मरीजों के साथ अल्जाइमर मरीजों की देखरेख करते हैं। ऐसे मरीजों की संख्या काफी है। यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया और एम्स दिल्ली के ताजा अध्ययन के अनुसार देश में एक करोड़ अल्जाइमर मरीज हैं। इसके सबसे अधिक 11 प्रतिशत मरीज जम्मू-कश्मीर में और बंगाल में 9.2 प्रतिशत हैं। बंगाल में ऐसे मरीजों की संख्या 9,20,000 है।
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प्रशिक्षण का भी अभाव
बंगाल में अल्जाइमर मरीजों की देखरेख करने की सरकारी व्यवस्था का अभाव तो है ही। साथ ही ऐसे मरीजों की देख-भाल करने वालों के लिए प्रशिक्षण की भी व्यवस्था नहीं है। एआरडीएसआइ की नीलांजना मौलिक ने बताया कि अल्जाइमर के मरीजों की देखरेख करने वाले प्रशिक्षित नहीं हैं। राज्य सरकार की ओर से इन्हें प्रशिक्षित करने की कोई व्यवस्था नहीं है। निजी संस्थान प्रशिक्षण देते हैं। सरकार को ऐसे मरीजों की देख-भाल करने वालों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करनी चाहिए, क्योंकि अब बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है।
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मरीजों का इलाज महंगा
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रतिम सेनगुप्ता ने बताया कि अल्जाइमर मरीजों का इलाज महंगा है। इसके मरीजों की आठ से 12 साल तक इलाज के साथ देखभाल करने के लिए हमेशा एक व्यक्ति को रखना पड़ता है। मौलिक ने बताया कि इसके लिए कम से कम प्रति माह 25 से 30 हजार रुपए खर्च होता है।
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यह है अल्जाइमर
अल्जाइमर एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। इसके तहत दिमाग की कोशिकाएं सिकुडऩे लगती है। इस कारण धीरे-धीरे व्यक्ति की याददाश्त खोने लगती है। यह लगभग 60 वर्ष की आयु में होती है। 65 वर्ष की उम्र होने तक व्यक्ति
अपना दैनिक कार्य भी भूल जाता है। ब्रिटेन की एक संस्था की ओर से ताजा अध्ययन से पता चला है कि यह रोग पुरुषों से अधिक महिलाओं और शहर के अलावा गांव की महिलाओं के होने की आशंका अधिक होती है।
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देश में अल्जाइमर मरीजों की स्थिति
राज्य रोगी संख्या प्रतिशत में
जम्मू-कश्मीर 11.4 प्रतिशत
ओडिशा 9.90
पश्चिम बंगाल 9.23
असम 8.47
हिमाचल प्रदेश 8.27
उत्तर प्रदेश 7.92
आंध्र प्रदेश 7.74
महाराष्ट्र 7.61
कर्नाटक 7.61
हरियाणा 5.8
दिल्ली 4.5
Published on:
22 Sept 2023 12:20 am
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