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ढेंकनाल: चिपको आंदोलन की तरह पेड़ों को बचाया, सीएम ने दिए जांच के आदेश

गांव की महिलाएं उत्तराखंड में सुंदरलाल बहुगुणा के चिपको आंदोलन की तरह पेड़ों को बचाने में लगी थीं,इसे देखकर लोगों को चिपको आंदोलन की याद आ गई...

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(पत्रिका ब्यूरो,भुवनेश्वर): ढेंकनाल जिले के बलराम पुर में 12.59 एकड़ पेड़ों को काटकर बीयर फैक्ट्री लगाने की योजना को गांव वालों के आंदोलन ने पलीता लगा दिया। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ढेंकनाल में बीयर फैक्ट्री लगाने के लिए हो रही वनों की कटान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए आयुक्त को जांच के आदेश दिए। जिले के बलरामपुर गांव में बीयर फैक्ट्री लगाने के लिए आवंटित जमीन पर पेड़ों की कटान के विरोध में गांव वाले आंदोलनरत हैं। गांव की महिलाएं उत्तराखंड में सुंदरलाल बहुगुणा के चिपको आंदोलन की तरह पेड़ों को बचाने में लगी थीं। इसे देखकर लोगों को चिपको आंदोलन की याद आ गई।


पेड़ों को बचाने के लिए ग्रामीणों का यह आंदोलन उत्तराखंड में सुंदरलाल बहुगुणा के चिपको आंदोलन जैसा है। गांव के लोग पेड़ों से चिपक कर पेड़ बचाने में लगे हैं। वन विभाग के अनुसार बलरामपुर में अब तक 500 से ज्यादा पेड़ों की कटान की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने रेवेन्यू डिविजनल कमिश्नर को जांच के आदेश देते हुए जल्दी ही रिपोर्ट सौंपने को कहा है।


शनिवार को पुलिस और गांव वालों के संघर्ष में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बीयर फैक्ट्री के लिए वनों की कटान का आदेश ढेंकनाल के जिला प्रशासन का था। वन काटने वालों को प्रशासन ने पुलिस की सुरक्षा मुहैया कराई थी। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद पेड़ों की कटान रोक दी गई है। यह रेवेन्यू लैंड को इडको (इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट कारपोरेशन) ने पी.बाटलर्स प्रा.लिं. कंपनी को आवंटित की थी। खुद मुख्यमंत्री ने तीन नवंबर को वीडियो से इस फैक्ट्री की आधारशिला रखी थी। कुल 12.59 एकड़ जमीन दी गई थी।

पेड़ों को बचाने के लिए महिलाओं ने दोनों हाथों से पेड़ों को घेरे में ले लिया और उन्हे कटने से बचाने को तत्पर रहीं। पर्यावरण कार्यकर्ता प्रफुल्ल सामंतरा ने पर्यावरण नष्ट करके बीयर फैक्ट्री लगाने की अनुमति के लिए राज्य सरकार की निंदा की। उल्लेखनीय है कि गांव वालों ने सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका भी लगायी थी जिसकी सुनवाई 20 नवंबर को है।