
Death Sentence: बालिकाओं पर डाली बुरी नजर तो होगा ये अंजाम...
Death Sentence: कटक ( महेश शर्मा ), ओडि़सा में बालिकाओं पर बुरी नजर ( Evil eye ) डालने वालों का अब बहुत बुरा अंजाम होगा। बालिकाओं के बलात्कारियों ( Rapists ) की अब खैर नहीं है। बलात्कारियों से निपटने के मामले में यह आदर्श राज्य बन गया है। पोक्सो कोर्ट कटक ने सालेपुर (कटक) में हुए नाबालिग से रेप और उसकी मौत के अभियुक्त को फांसी की सजा ( Death Sentence ) सुनायी है। अभियुक्त मुश्ताक ने नाबालिग को चाकलेट देकर फुसलाया और स्कूल के अंदर ही बलात्कार किया। मामले का खुलासा होने के भय से उसके सिर पर पत्थर से वार करके उसकी हत्या कर दी। यह लोमहर्षक वारदात कटक के सालेपुर के गांव जगन्नाथपुर में 21 अप्रैल 2018 को हुई। बालिका की 19 अप्रैल 2019 को एससीबी मेडिकल कालेज के अस्पताल में दर्दनाक मौत हो गयी थी। पीडि़ता तीन दिन तक लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थी।
पोक्सो कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा
इसमें मामले शेख मुश्ताक मुख्य आरोपी था। पुलिस ने मुश्ताक पर आईपीसी की 376, 302 और 363 धारा के साथ पोक्सो के सेक्शन 6 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। यह अपराध उसी दिन हुआ जब ओडिशा सरकार ने पोक्सो एक्ट राज्य में लागू किया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और 19 दिनों में चार्जशीट फाइल कर दी। ओडिशा में बीते दो महीने में रेप के चार अभियुक्तों को पोक्सो कोर्ट ने फांसी की सजा सुनायी है। दावा है कि ओडिशा ऐसा पहला राज्य है जहां पर बलात्कार के आरोपियों के साथ सख्ती से निपटा जा रहा है।
अपराधियों के प्रति बेहद सख्ती
दो महीनें में चार रेप आरोपियों पर आरोप साबित करते हुए फांसी की सजा देना अपराधियों के प्रति बेहद सख्ती का उदाहरण है। सबसे पहले पोक्सो विशेष अदालत ने 27 जुलाई को अनुगुल के रेप केस के आरोपी पर आरोप सिद्ध होते ही फांसी की सजा सुना दी थी। दूसरा मामला मयूरभंज का है जब 28 अगस्त को अभियुक्त को फांसी की सजा सुनायी गई। फिर 10 सितंबर को जगतसिंह पुर में रेप के एक मामले में फांसी सुनायी गयी। उसके 19 सितंबर यानी आज कटक के सालेपुर बलात्कार केस में शेख मुश्ताक को फांसी की सजा पोक्सो कोर्ट ने सुनायी।
पुलिस ने किया सराहनीय कार्य
इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल डेवलेपमेंट की निदेशक सोशल वर्कर शुभाश्री दास का कहना है कि पोक्सो अदालत ने जिस तेजी से सुनवायी करके फांसी की सजा सुनायी है उसका प्रभाव समाज पर पड़ेगा। इससे रेप की घटनाओं पर अंकुश लग सकता है। सुजाता सिंह का कहना है कि ओडिशा में दो माह में चार रेप अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाकर पोक्सो कोर्ट ने संवेदनशीलता दिखायी है। यह फैसला स्वागत योग्य है।
बलात्कारी को सांस लेना का भी अधिकार नहीं
बलात्कारी को समाज में जीने का कोई अधिकार नहीं है। सोशल वर्कर निवेदिता पटनायक ने बताया कि पुलिस ने भी रेप के केसों में जांच पूरी करते हुए जल्दी चार्जशीट दाखिल करने का सराहनीय कार्य किया है। लगता है कि महिलाओं-बालिकाओं पर कोई नजर उठाने से पहले बार-बार सोचेगा। बलात्कारी को समाज में सांस लेने का कोई अधिकार नहीं है।
Published on:
19 Sept 2019 05:53 pm
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