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भारत की इकलौती मादा वनमानुष ‘बिन्नी’ की मौत, लुप्त होने की कगार पर है यह प्रजाति, जाने इनसे जुड़ी खास बातें

बिन्नी को पुणे के जू से 2003 में लाया गया था...

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binni

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(भुवनेश्व): बीमारी से जूझ रही देश की इकलौती मादा ओरंगुटान (वनमानुष) vanmanush बिन्नी ने बुधवार रात दस बजे नंदनकानन प्राणि उद्यान में दम तोड़ दिया। उसकी आयु 41 वर्ष थी। सामान्यतया वनमानुष 60 साल तक जिंदा रहते हैं। वनमानुषों की लुप्तप्राय प्रजाति में शामिल इस वन्यप्राणी का पूरे एशिया में सफाया हो रहा है। बिन्नी के गले में संक्रमण था। उसके बाद उसकी हालत बिगड़ती गयी। यह जानकारी प्राणि उद्यान के उपनिदेशक पशु चिकित्सक डा जयंती दास ने दी। vanmanush बिन्नी को पुणे के जू से 2003 में लाया गया था।

वैज्ञानिकों ने खोजी नई प्रजाति

वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्हें वनमानुष की नई प्रजाति की खोज की है। बता दें कि वनमानुष लुप्त होने वाली प्रजाति में आते हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि महज 800 वनमानुष बचे हुए हैं। ये सबसे तेजी से तुप्त होने वाली प्रजातियों में से एक हैं। उन्होंने आगे कहा कि जहां वनमानुष रहते हैं, वो जगह काफी तेजी से खत्म होती जा रही है।


इंडोनेशिया के उत्तरी सुमांत्रा में पाए गए तपानुली वनमानुष वास्तविक रूप से सुमांत्रन वनमानुष आबादी का हिस्सा हैं। लेकिन अलग प्रजाति की खोज का मतलब है कि ये काफी तेजी से लुप्त हो रहे हैं। शोधकर्ताओं ने आगे बताया कि बचे हुए जंगलों को बचाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो हमारे रहते हुए ही ये वनमानुष गायब हो जाएंगे।


बंदरों की यह नई प्रजातियां आई सामने

बता दें कि इससे पहले छह महान बंदरों की प्रजाति सामने आ चुकी है। ये सुमांत्रन, बोरनियन वनमानुष, पूर्वी और पश्चिमी गोरिल्ला, चिम्पैंजी और बोनोबोस शामिल हैं। यह शोध ग्रामीणों के साथ संघर्ष में मारे गए पुरुष व्यक्ति के कंकाल के विश्लेषण पर आधारित है। 37 अध्ययन के लेखक रह चुके मिटीमियर शोध से काफी उत्साहित हैं।