
जगन्नाथ मंदिर
(पत्रिका ब्यूरो,भुवनेश्वर): सदी के सबसे लंबे समय तक रहने वाले चंद्रग्रहण को देखने के लिए ओडिशा उत्साहित है। पुरी में भक्तों की भीड़ सूतक समाप्त होते ही शुरू हो जाएगी। ग्रहणकाल में दर्शन का लाभ फलदायक बताया जाता है। लोगों ने धर्म और शास्त्र के अनुसार चंद्रग्रहण के दौरान किसी भी प्रकार निषिद्ध गतिविधियों से खुद को अलग रखने का निर्णय लिया है। महाप्रभु की रीतिनीति पर भी ग्रहण का असर पड़ेगा।
ग्रहणकाल में भक्त करेंगे दर्शन
यह चंद्रग्रहण रात में 11 बजकर 54 मिनट से पड़ेगा। ग्रहण शुरू होते ही महाप्रभु ग्रहण स्नान करेंगे और ग्रहण भोग भी लगाया जाएगा। इस दौरान मंदिर के पट खुले रहेंगे। बताया जाता है कि चंद्र ग्रहण के दौरान भारी संख्या में महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन को भक्तों की भीड़ रहती है। नीलाद्रि बिजे यानी रथयात्रा के बाद रत्न सिंहासन पर विराजने के दो दिन के भीतर ठीक गुरुपूर्णिमा वाले दिन चंद्र ग्रहण लगने को संयोग के रूप में लोग देख रहे हैं। ग्रहण समाप्त होते ही बड़दंड के पास श्रीमंदिर के सिंहद्वार समेत सभी चारों द्वारों पर दीन दुखियों को दानपुण्य देने के लिए लोगों का मजमा एकत्र रहता है। भगवान के दर्शन पाकर धन्य लोग दान करते हैं।
लग चुका है सूतक
चंद्रगहण से नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू हो गया है। इस दौरान कई कामों को न करने को कहा जाता है। दूसरी तरफ कुछ काम शुभ भी माने जाते हैं। बताते हैं कि शास्त्रों के मुताबिक सूतक 2 बजकर 54 मिनट से लग चुका है। जबकि यह सूर्य ग्रहण में 12 घंटे पहले लगता है। सूतक काल से पहले समस्त धार्मिक काल से पहले निपटाने का विधान बताया जाता है। मंदिरों में पूजा अर्चना भी रोक दी जाती है। गुरुपूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण लगने का अद्भुत संयोग माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद दान आदि का लाभ अन्य दिनों के मुकाबले अधिक मिलता है। यह चंद्रग्रहण 28 जुलाई को 3 बजकर 49 मिनट तक रहेगा, सुबह ग्रहण का दान देना फलदाई बताया जाता है। लोगों ने गुरुपूर्णिमा होने के कारण 2 बजकर 54 मिनट के पहले तक गुरु पूजन दक्षिणा दान की परंपराओं का निर्वहन किया जाता रहा।
Published on:
27 Jul 2018 06:42 pm
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