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पंडा-पुलिस विवादः जगन्नाथ के दर्शन को तरसे हजारों भक्त,मंदिर बंद होने से महाप्रभु की रीतिनीति बाधित

श्रीमंदिर परिसर के भीतर ही सेवायत और पुलिस के बीच मारपीट की घटना गुरूवार रात की है। एक सेवायत घायल हो गया है...

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jagarnath tample

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(पत्रिका ब्यूरो,भुवनेश्वर): तीर्थ के चार धाम में से एक जगन्नाथ पुरी धाम में श्रीजगन्नाथ मंदिर में शुक्रवार सवेरे से ताला बंद होने से हजारों भक्तों की भीड़ सिंह द्वार पर जमा है। सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच भक्त अपने भगवान के दर्शन के लिए इंसान से मांग कर रहे हैं।

सेवायतों और पुलिस के बीच विवाद के कारण सेवायतों ने मंदिर कपाट बंद कर दिए। महाप्रभु जगन्नाथ की रीतिनीति पूरी तरह से बाधित है। यहां तक महाप्रभु को भोग तक नहीं लगाया जा सका। श्रीमंदिर परिसर के भीतर ही सेवायत और पुलिस के बीच मारपीट की घटना गुरूवार रात की है। एक सेवायत घायल हो गया है। दोनों तरफ से सिंहद्वार थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। पुलिस कांस्टेबल विश्वजीत परीजा और सेवायत भवानी शंकर महापात्र के बीच मारपीट के बीच सेवायत को चोटें आईं। इस घटना को लेकर महाप्रभु के 36 नियोग के हजारों सेवायतों में भारी रोष है। इस बाबत श्रीमंदिर प्रशासन और सेवायतों के बीच बातचीत विफल हो गई। सेवायत कांस्टेबल की गिरफ्तारी और निलंबन की मांग को लेकर अड़े हैं।


भक्तों की भीड़ बीते छह घंटे से भी ज्यादा समय से गेट खुलने का इंतजार कर रही है। सुदूरवर्ती क्षेत्रों से आए भक्तों का कहना है कि बदइंतजामी के चलते श्रीमंदिर में वो लोग दर्शन तक नहीं कर पा रहे हैं। उनकी मांग है कि व्यवस्था केंद्र सरकार के हाथों में देना चाहिए। आए दिन भक्तों से दुर्व्यवहार करने वाले सेवायतों और मंदिर परिसर के भीतर तैनात पुलिस हमेशा भक्तों को परेशान करते रहे हैं। खाकी वर्दी में पुलिसकर्मी मोबाइल पर गेम खेलते और चैटिंग करते देखे जा सकते हैं।


यूं उपजा विवाद

पुलिस अधीक्षक सार्थक सारंगी का कहना है कि सेवायतों से बातचीत की जा रही है। फुटेज देखकर निर्णय लेंगे। यदि मंदिर खुलता है तो भक्त दर्शन करेंगे। श्रीमंदिर प्रशासन प्रदीप्तो महापात्र का कहना है कि बातचीत चल रही है। कलेक्टर ज्योतिप्रकाश दास का कहना है कि दोनों तरफ से एफआईआर की जा चुकी है। बातचीत अब तक किसी नतीजे तक नहीं पहुंची। मंगल आरती नहीं हो सकी। विवाद पर बताया जाता है कि पश्चिम बंगाल के तीन भक्तों से पुलिस ने आई कार्ड मांग लिया तो उन्होंने अपने पंडा महापात्र का नाम बताया। पंडा ने भी पुलिस से उन्हें छोड़ने को कहा। पुलिस ने कड़ा जवाब दिया जो विवाद का कारण बना।