
भक्तों को बचाने के लिए उनसे 14 दिन दूर रहते हैं जगन्नाथ भगवान, Coronavirus के चलते भक्तों को सहनी पड़ेगी दूरी
(भुवनेश्वर): कोरोना वायरस का संक्रमण ना फैले इसके लिए देशभर में एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में प्रमुख मंदिरों जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं उन्हें बंद कर दिया गया है। ऐसे ही मंदिरों में शामिल हैं ओडिशावासियों की श्रद्धा का प्रमुख केंद्र पुरी का जगन्नाथ धाम। शुक्रवार से श्रीमंदिर को बंद कर दिया जाएगा। 31 मार्च तक भक्तजन जगन्नाथ महाप्रभु के दर्शन नहीं कर पाएंगे। यह मियाद आगे भी बढ़ सकती है।
यह एक ऐसा मौका है जब भक्तों की जान बचाने के लिए उन्हें भगवान से दूर रखा जा रहा हैं। लेकिन हर साल में 14 दिन जगन्नाथ महाप्रभु भक्तों की रक्षा के लिए उनसे दूर रहते हैं। दरअसल जगन्नाथ महाप्रभु की लीला जगत से न्यारी है। उनकी रीति नीति भी सबसे अलग है। महाप्रभु जीवंत रूप में पुजे जाते हैं। वे इंसानों की तरह बीमार भी होते हैं और उनका इलाज भी किया जाता है। विश्वप्रसिद्ध पुरी रथयात्रा से पहले ज्येष्ठ माह की स्नान पूर्णिमा को उन्हें बुखार आ जाता है। अमावस्या तक 14 दिन उनकी सेवा एक शिशु के रूप में की जाती है। इस दौरान जगन्नाथ मंदिर के पट बंद रहते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान महाप्रभु भक्तों के हर कष्ट को अपने ऊपर लेते हैं। इस बार स्नान पूर्णिमा 5 जून को है और 23 जून से रथ यात्रा शुरू होने जा रही है।
आज कोरोना वायरस के चलते मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बंद किया जा रहा है। इस तरह साल में दो बाद महाप्रभु भक्तों से और भक्तों को उनसे दूर रहना होगा। आज की दशा में अपनी रक्षा के लिए महाप्रभु से दूर रहकर भक्तों को समपर्ण करना पड़ेगा तो इसके बाद 14 दिन भक्तों की रक्षा के लिए महाप्रभु खुद उनसे दूर रहेंगे। श्रद्धा और विश्वास का अनूठा नजारा भारतीय संस्कृति में ही देखने को मिल सकता है।
Published on:
19 Mar 2020 08:49 pm
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