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ईंधन बचाने का अनोखा संदेश: तेज धूप में छाता लेकर पैदल निकलीं बिजनौर डीएम, लोगों की सड़क पर ही सुनी फरियादें

Bijnor News: बिजनौर की डीएम जसजीत कौर ने ईंधन बचाने और फिटनेस का संदेश देने के लिए तेज धूप में घर से कलेक्ट्रेट तक पैदल सफर किया।

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तेज धूप में छाता लेकर पैदल निकलीं बिजनौर डीएम

Bijnor DM Jasjit Kaur: बिजनौर की जिलाधिकारी जसजीत कौर ने बुधवार को एक अलग अंदाज में लोगों को पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचत और फिटनेस का संदेश दिया। तेज गर्मी और चिलचिलाती धूप के बावजूद डीएम ने सरकारी वाहन का इस्तेमाल करने के बजाय अपने आवास से कलेक्ट्रेट तक का सफर पैदल तय किया। उनका यह कदम प्रशासनिक गलियारों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया। सड़क पर चलते हुए लोगों ने डीएम को करीब से देखा तो कई लोग हैरान रह गए।

सुबह पैदल पहुंचीं कार्यालय

सुबह करीब 10 बजे जिलाधिकारी जसजीत कौर अपने सरकारी आवास से निकलीं। उनके साथ सुरक्षा कर्मी और स्टाफ के कुछ कर्मचारी भी मौजूद रहे। डीएम ने हाथ में छाता लेकर पैदल ही कलेक्ट्रेट की ओर रुख किया। गर्मी अधिक होने के बावजूद उनके चेहरे पर आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा था। रास्ते में मौजूद लोगों ने भी डीएम की इस पहल की सराहना की और इसे एक सकारात्मक संदेश बताया।

दोपहर में भी पैदल लौटीं आवास

केवल कार्यालय पहुंचने तक ही नहीं, बल्कि दोपहर करीब एक बजे डीएम ने कलेक्ट्रेट से अपने सरकारी आवास तक वापस लौटने के लिए भी पैदल रास्ता चुना। इस दौरान उनके एक हाथ में छाता था, जबकि दूसरे हाथ में जरूरी सरकारी फाइलें और कागजात दिखाई दिए। तेज धूप में पैदल चलती डीएम को देखकर आसपास मौजूद लोग चर्चा करते नजर आए। उनके साथ सुरक्षा कर्मी और प्रशासनिक स्टाफ भी लगातार चलता रहा।

सड़क पर ही सुनी लोगों की समस्याएं

कलेक्ट्रेट परिसर के पास पैदल जाते समय जिलाधिकारी को एक बुजुर्ग महिला और एक युवक अपनी समस्याओं के साथ खड़े मिले। डीएम ने बिना देर किए सड़क पर ही उनकी शिकायतें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को तत्काल निस्तारण के निर्देश दिए। लोगों ने डीएम के इस व्यवहार की जमकर तारीफ की। आमतौर पर अधिकारियों से मिलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, लेकिन डीएम ने मौके पर ही लोगों की बात सुनकर संवेदनशील प्रशासनिक कार्यशैली का परिचय दिया।

अधिकारियों और कर्मचारियों में बनी चर्चा

डीएम जसजीत कौर की यह पहल पूरे दिन प्रशासनिक दफ्तरों में चर्चा का विषय बनी रही। कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने इसे प्रेरणादायक कदम बताया। लोगों का कहना था कि यदि अधिकारी इस तरह सार्वजनिक परिवहन, पैदल चलने और ईंधन बचाने को बढ़ावा देंगे तो समाज में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।