
बिजनौर जिला कारागार में फंदे पर लटका मिला हिस्ट्रीशीटर..
Gangster Suicide Jail: बिजनौर जिला कारागार में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब गैंग्स्टर एक्ट में निरुद्ध एक कैदी ने संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव पृथ्वीपुर मोल्हड़ निवासी 30 वर्षीय दीपक कुमार पुत्र चंद्रपाल के रूप में हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही जेल प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई, जबकि मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने जेल प्रशासन पर हत्या का गंभीर आरोप लगाते हुए जोरदार हंगामा किया।
जानकारी के अनुसार दीपक कुमार 20 फरवरी 2025 से जिला कारागार में बंद था। उसके खिलाफ शहर कोतवाली में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे और वह हिस्ट्रीशीटर भी बताया जा रहा था। अदालत द्वारा उसे दो अलग-अलग मामलों में छह वर्ष और दो वर्ष की सजा सुनाई गई थी। पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम गैंग्स्टर एक्ट के तहत भी दर्ज था। जेल अधिकारियों के मुताबिक शनिवार रात दीपक की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी और घबराहट की शिकायत के बाद उसे जेल के अस्पताल वार्ड में भर्ती कराया गया था।
जेल प्रशासन के अनुसार रविवार दोपहर करीब डेढ़ बजे जेल स्टाफ ने अस्पताल वार्ड के पीछे स्थित एक आम के पेड़ पर दीपक को रस्सी के फंदे से लटका हुआ देखा। यह दृश्य देखते ही जेल कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में स्टाफ और अन्य बंदियों की मदद से उसे नीचे उतारा गया और तत्काल मेडिकल अस्पताल ले जाया गया। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद जेल प्रशासन ने पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया और उच्च अधिकारियों को सूचना दी गई।
दीपक की मौत की खबर जैसे ही उसके परिवार और गांव वालों तक पहुंची, बड़ी संख्या में लोग जिला अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। परिजन का आरोप था कि दीपक ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि जेल प्रशासन की मिलीभगत से उसकी हत्या की गई है। लोगों ने पोस्टमार्टम प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग करने लगे। माहौल लगातार गर्माता गया और देखते ही देखते पोस्टमार्टम हाउस के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई।
पुलिस अधिकारियों ने परिजनों और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ शांत होने को तैयार नहीं हुई। इस दौरान कुछ लोग शव को पोस्टमार्टम हाउस से जबरन ले जाने लगे, जिसे पुलिस ने रोकने की कोशिश की। इसी बात को लेकर माहौल और बिगड़ गया तथा पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्कामुक्की शुरू हो गई। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी बुलाना पड़ा।
इसी दौरान बरेली रेंज के डीआईजी अजय साहनी की गाड़ी जाम में फंस गई। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने उनकी गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई महिलाएं गाड़ी के आगे लेट गईं और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ लोगों ने गाड़ी पर लगे स्टार को तोड़ दिया और वाहन पर मुक्के भी मारे। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस को डीआईजी की सुरक्षा के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। करीब दस मिनट की कोशिश के बाद पुलिस ने भीड़ को हटाकर किसी तरह डीआईजी की गाड़ी को वहां से निकाला।
पुलिस का इस मामले में कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। शव का पैनल से पोस्टमार्टम कराया जा रहा है ताकि मौत के सही कारणों का पता चल सके। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
10 May 2026 09:00 pm
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