
बीमारों पर बीमा, मौत के बाद रकम हड़पने का खेल | Image Video Grab
Fake insurance gang Bijnor: बिजनौर शहर कोतवाली पुलिस ने फर्जी बीमा कराकर बीमा राशि हड़पने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए इसके सरगना नवाब अली और उसकी पत्नी रुखशी अंजुम को गिरफ्तार किया है। दोनों पति-पत्नी पर आरोप है कि वे योजनाबद्ध तरीके से बीमार लोगों का बीमा कराकर उनकी मृत्यु के बाद बीमा की रकम अपने खातों में ट्रांसफर कर लेते थे। पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एसपी सिटी ने बताया कि फूलवती पत्नी चंद्रहास, मोनू पुत्र तेजराम, निक्की सावन पुत्र बिजेंद्र और महिपाल पुत्र जबर सिंह समेत कई लोगों ने पुलिस में लिखित शिकायत दी थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि उनके गंभीर रूप से बीमार परिजनों का बिना जानकारी कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बीमा कराया गया और बाद में बीमा की पूरी राशि हड़प ली गई।
जांच में सामने आया कि नवाब अली अपनी पत्नी रुखशी अंजुम के साथ मिलकर एक संगठित गिरोह संचालित कर रहा था। इस मामले में पुलिस ने नवाब अली पुत्र फकीरा, शरद त्यागी पुत्र सत्यपाल त्यागी, आशा तारावती, एक अन्य व्यक्ति और एक अज्ञात वकील के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। गिरोह के सभी सदस्य आपस में भूमिकाएं बांटकर इस ठगी को अंजाम देते थे।
पुलिस के अनुसार यह गिरोह गांवों में आशा कार्यकर्ताओं के जरिए ऐसे बीमार व्यक्तियों की पहचान करता था, जिनकी हालत गंभीर होती थी और जिनकी कुछ दिनों या महीनों में मृत्यु की आशंका रहती थी। इसके बाद आरोपियों द्वारा षड्यंत्र रचकर इन बीमार लोगों को कागजों में पूरी तरह स्वस्थ दर्शाया जाता था, ताकि बीमा कंपनियों को गुमराह किया जा सके।
गिरोह के सदस्य फर्जी मेडिकल रिपोर्ट, पहचान पत्र और अन्य कूटरचित दस्तावेज तैयार कर ऑनलाइन बीमा करवाते थे। बीमा पॉलिसी जारी होने के बाद नॉमिनी का बैंक खाता भी घर पर ही खुलवाया जाता था, ताकि पीड़ित परिवार को किसी तरह की जानकारी न हो।
बीमा के बाद आरोपी फर्जी दस्तावेजों के सहारे नया सिम कार्ड निकलवाते थे और उसी सिम को नॉमिनी के बैंक खाते से लिंक कर दिया जाता था। इसके जरिए खाते में आने वाली बीमा राशि का पूरा नियंत्रण गिरोह के पास रहता था और वे स्वयं लेनदेन कर रकम निकाल लेते थे।
यदि किसी कारणवश बीमा कंपनी द्वारा पॉलिसी रद्द कर दी जाती थी, तो गिरोह अपने संपर्क में मौजूद वकील के माध्यम से उपभोक्ता फोरम में फर्जी दस्तावेज और भ्रामक तथ्य प्रस्तुत करता था। इसके जरिए भी बीमा कंपनियों से मुआवजे के नाम पर पैसा वसूल कर लिया जाता था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि अभियुक्तों द्वारा अधिकतर पीड़ितों का बीमा एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में कराया गया था। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका खंगाली जा रही है।
Published on:
04 Jan 2026 09:27 pm
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