3 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बिजनौर में गूंजा ‘होली है’ का जयघोष: 1885 स्थानों पर जली होलिका, चप्पे-चप्पे पर तैनात रही पुलिस!

Bijnor News: बिजनौर जिले में 1885 स्थानों पर होलिका दहन बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ संपन्न हुआ।

2 min read
Google source verification
bijnor holika dahan 2026 celebration

बिजनौर में गूंजा 'होली है' का जयघोष | AI Generated Image

Holika Dahan Bijnor: बिजनौर जिले में सोमवार की रात होलिका दहन का आयोजन बड़े उल्लास और धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। जिलेभर में लगभग 1885 स्थानों पर होलिका स्थापित की गई थी, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए होलिका की पूजा-अर्चना की।

सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी नहीं

इस दौरान जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता बनाने के लिए विशेष कदम उठाए। पुलिस बल और सुरक्षा कर्मी हर प्रमुख स्थान पर तैनात थे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और पर्व शांतिपूर्वक संपन्न हो सके। जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) ने देर शाम खुद पैदल गश्त कर सभी होली के स्थानों का निरीक्षण किया।

महिलाओं और बच्चों की उत्साही भागीदारी

होली की पूर्व संध्या पर महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए विशेष पूजा-अर्चना की। जौ की बालियों को भूनकर गीत गाते हुए होलिका की परिक्रमा की गई। बच्चों में इस पर्व को लेकर खास उत्साह देखा गया, जो खुशी-खुशी होली के इस आयोजन में शामिल हुए और माहौल को और भी जीवंत बना दिया।

जिले के प्रमुख स्थानों पर उल्लास

बिजनौर शहर के ऐतिहासिक रामलीला मैदान, श्रीराम चौक, नुमाइश ग्राउंड, रविदास नगर, जाटान, काजीपाड़ा, खत्रियान, शिवजी नगर और पायल कॉलोनी समेत अनेक प्रमुख क्षेत्रों में होलिका दहन हुआ। हर जगह पंडितों ने मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत पूजा-अर्चना कराई और इसके बाद होलिका में अग्नि प्रज्वलित की गई। आग लगते ही लोगों ने 'होली है' के जयघोष के साथ एक-दूसरे को शुभकामनाएं दी।

उत्सव की देर रात तक धूम

होलिका दहन के बाद आसपास के मोहल्लों और गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, जिससे देर रात तक होली का रंग-बिरंगा उत्सव चलता रहा। स्थानीय लोगों ने इस अवसर पर पारंपरिक मिठाइयों और पकवानों का आनंद लिया। जिले में यह पर्व हर उम्र के लोगों के लिए आनंद और खुशी का प्रतीक बन गया।