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बिजनौर बना यूपी का इंडस्ट्रियल पावरहाउस: 750 करोड़ निवेश से ‘विदुर की धरती’ की नई तस्वीर

Bijnor News: 750 करोड़ के विदेशी निवेश, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि-औद्योगिक विकास के दम पर बिजनौर तेजी से उत्तर प्रदेश का उभरता इंडस्ट्रियल हब बनता जा रहा है।

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बिजनौर बना यूपी का इंडस्ट्रियल पावरहाउस..

Agrysto Investment UP: शिवालिक की तलहटी में बसा और गंगा की पवित्र धारा से सिंचित बिजनौर अब अपनी पारंपरिक पहचान से आगे बढ़कर विकास की नई कहानी गढ़ रहा है। कभी केवल कृषि प्रधान जिले के रूप में पहचाना जाने वाला यह क्षेत्र अब उत्तर प्रदेश के बदलते विकास मॉडल का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। ‘विदुर की धरती’ के नाम से प्रसिद्ध यह जनपद अब उद्योग, पर्यटन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के संगम के रूप में उभर रहा है।

प्राकृतिक धरोहर से वैश्विक पहचान

बिजनौर की पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में हैदरपुर वेटलैंड बर्ड सेंचुरी की अहम भूमिका रही है। यहां हजारों प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं, जो इसे वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाती हैं। धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह क्षेत्र समृद्ध है, विदुर कुटी और कण्व ऋषि आश्रम जैसे स्थल पौराणिक विरासत को जीवंत करते हैं। सरकार द्वारा इन स्थलों के सौंदर्यीकरण के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है, जिससे पर्यटन को नई दिशा मिल रही है।

गन्ना बेल्ट से आधुनिक खेती तक का सफर

बिजनौर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ आज भी कृषि ही है, विशेष रूप से गन्ना उत्पादन में यह जिला प्रदेश के अग्रणी क्षेत्रों में शामिल है। जिले में 10 शुगर मिलें संचालित हैं, जो किसानों की आय का प्रमुख स्रोत हैं। पहले गन्ना भुगतान को लेकर किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब समयबद्ध भुगतान व्यवस्था ने उनका विश्वास मजबूत किया है। इसके साथ ही, किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर ड्रैगन फ्रूट और पॉलीहाउस में फूलों की खेती जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर रहे हैं।

विदेशी निवेश से औद्योगिक क्रांति

बिजनौर अब औद्योगिक निवेश के नक्शे पर भी तेजी से उभर रहा है। बेल्जियम और भारत के संयुक्त उपक्रम ‘एग्रिस्टो मासा’ ने यहां ₹750 करोड़ का निवेश कर आलू प्रसंस्करण प्लांट स्थापित किया है। यह प्लांट न केवल उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का निर्यात करता है, बल्कि लगभग 2,500 किसानों को आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाने में भी सहायक बन रहा है। इससे जिले में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर का नया युग

बिजनौर में तेजी से विकसित हो रही कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर ने विकास को नई गति दी है। मेरठ-पौड़ी हाईवे (NH-119) का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है, जो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा। गंगा बैराज पर बन रहा 2,500 मीटर लंबा पुल एनसीआर को सीधे उत्तराखंड से जोड़ेगा। इसके अलावा, बिजनौर रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करेगा और जिले की कनेक्टिविटी को और मजबूत बनाएगा।

महिला सशक्तिकरण बना विकास का आधार

बिजनौर में महिला सशक्तिकरण का एक प्रभावशाली मॉडल देखने को मिल रहा है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लगभग 2.5 लाख महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। प्रशासन द्वारा शुरू किया गया ‘विदुर’ ब्रांड इस दिशा में एक अनूठी पहल है, जिसके तहत 150 से अधिक उत्पादों का निर्माण और बिक्री की जा रही है। जिले में संचालित 100 से अधिक ‘विदुर स्टोर’ और ‘विदुर कैफे’ महिलाओं की आय में वृद्धि कर उन्हें समाज में नई पहचान दे रहे हैं।

शिक्षा और स्वास्थ्य में नई ऊंचाइयां

शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बिजनौर तेजी से प्रगति कर रहा है। ‘महात्मा विदुर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय’ में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू हो चुकी है, जिससे स्थानीय छात्रों को बेहतर चिकित्सा शिक्षा मिल रही है। साथ ही, यहां 100 बेड का क्रिटिकल केयर सेंटर निर्माणाधीन है, जो स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगा। 2024 में स्वीकृत केंद्रीय विद्यालय नई पीढ़ी को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

परंपरा और प्रगति का अनूठा संगम

बिजनौर आज उस मुकाम पर खड़ा है जहां परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है। विदुर की सादगी, गंगा की पवित्रता और विकास की तेज रफ्तार ने इस जिले को नई पहचान दी है। यह जनपद अब ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ और ‘तेजी से बढ़ते भारत’ का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है, जहां हर क्षेत्र में प्रगति की नई संभावनाएं जन्म ले रही हैं।