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देश दहलाने की फिराक में था पाकिस्तानी आका, सीरियल ब्लास्ट से सैकड़ों जान लेने की साजिश नाकाम

Terror Network Exposed: बिजनौर में हुई आगजनी के एटीएस ने एक ऐसे खतरनाक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, जिसके तार पाकिस्तान से जुड़े हैं। जांच के दौरान एटीएस ने 4 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है।

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यूपी एटीएस ने गिरफ्तार किए चार संदिग्‍ध। (Source: Police Media Cell)

बिजनौर में हुई आगजनी की घटना के बाद यूपी एटीएस ने जब संदिग्ध गतिविधियों की पड़ताल शुरू की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इसके बाद एटीएस की टीमों ने अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर 4 संदिग्धों को पकड़ा है। इनमें मेरठ के अगवानपुर गांव थाना परीक्षितगढ़ इलाके का साकिब उर्फ डेविड (25), मेरठ का अरबाब (20), गौतमबुद्धनगर के राम विहार का विकास गहलावत उर्फ रौनक (27) और राम विहार कालोनी गौतमबुद्धनगर के ही लोकेश उर्फ पोपला पंडित उर्फ बाबू उर्फ संजू (19) शामिल है।

इनसे पूछताछ में एक बड़े आतंकी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। आतंकी मॉड्यूल के निशाने पर लखनऊ, गाजियाबाद और अलीगढ़ थे। मॉड्यूल पहले इन शहरों में वारदातों को अंजाम देकर माहौल में भय पैदा करता, उसके बाद अन्य शहरों को निशाना बनाता। जांच में यह भी पता पता चला है कि बिजनौर की घटना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी।

माइंडवॉश करता था अबू बकर

जांच में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब इस मॉड्यूल के तार महाराष्ट्र के पुणे में हुई आगजनी की घटना से जुड़ते नजर आए। इस पूरे मामले में पाक आतंकी अबू बकर का नाम सामने आया है। वह भारत में अशांति फैलाने की साजिश रच रहा था। जांच में यह सामने आया कि अबू बकर इन युवकों को धार्मिक कट्टरपंथी वीडियो भेजकर उनका माइंडवॉश करता था और उन्हें भड़काने का काम करता था। इसके बाद वह उनसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने और आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिलवाने की साजिश रच रहा था। इस मॉड्यूल से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश अभी भी जारी है।

संवेदनशील जानकारी जुटाने का मिला था टास्क

जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पता चला है कि गिरफ्तार चारों संदिग्ध आतंकियों को पाकिस्तान में बैठे अबू बकर ने देश की खुफिया एजेंसियों और कई अहम व्यक्तियों की जानकारी जुटाने का टास्क दिया था। आरोपियों के मोबाइल की सर्च हिस्ट्री में कई संवेदनशील नाम और कीवर्ड मिले, जिससे उनकी मंशा साफ हो गई। इस काम के लिए ये कई बार दिल्ली भी गए थे।

गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों ने सबूत मिटाने के लिए मोबाइल डेटा, चैट हिस्ट्री और सर्च रिकॉर्ड डिलीट कर दिए थे, लेकिन फोरेंसिक टीम ने तकनीकी मदद से डाटा रिकवर कर लिया। जांच में सामने आया कि अरबाब की गिरफ्तारी के बाद साकिब को भनक लग गई थी, जिसके बाद उसने जल्दबाजी में अपना मोबाइल फॉर्मेट कर दिया, लेकिन एटीएस की जांच में उसके भी डिजिटल सबूत सामने आ गए।

बड़े हमले की तैयारी

इसके साथ ही जांच एजेंसियों ने यह भी पाया कि ये चारों आरोपी बड़े आतंकी हमले की तैयारी में जुटे थे। वे टाइम बम बनाना सीख रहे थे और देश के कई मॉल व बड़ी इमारतों में सीरियल ब्लास्ट की साजिश रच रहे थे। इसके अलावा केमिकल बम के जरिए मॉल की पार्किंग में आग लगाने और रेलवे के सिग्नल बॉक्स उड़ाकर बड़े ट्रेन हादसे कराने की योजना भी बनाई जा रही थी, ताकि अधिकतम नुकसान और दहशत फैलाई जा सके।

बिजनौर की घटना का पूरा मामला

बता दें कि बिजनौर के किरतपुर क्षेत्र के मोहल्ला झंडा में 4 मार्च 2026 को एक पिकअप वाहन में पेट्रोल डालकर आग लगाने की घटना सामने आई थी। इस मामले में पुलिस ने अफगनान, किरतपुर निवासी अबुजर शमीम राइन को गिरफ्तार किया था। उसने पुलिस को बताया था कि मुंबई में रह रहे मौसेरे भाई जैद निवासी किरतपुर, मुहल्ला लुकमानपुरा से पैसे मांगे थे। जैद ने अबूबकर नाम के एक व्यक्ति से टेलीग्राम पर बात कराई थी। अबूबकर ने उसे हिंदू संप्रदाय के लोगों की गाड़ियों में आग लगाने का टास्क दिया था। इस इनपुट के बाद एजेंसियां सतर्क हो गई थी।