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बिजनौर की रहने वाली बच्ची 6 साल से खा रही थी बाल, आखिर क्यों ?

बिजनौर में बाल खाने की बीमारी (ट्राईकोविजार) से पीड़ित नाबालिग के पेट से सर्जन डॉ. प्रकाश ने बालों का ढाई किलो का गुच्छा निकाला। डॉक्टर का कहना है कि नाबालिग के पेट पर बाल जमा होने के कारण उसे काफी परेशानी हो रही थी।

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ट्राइकोवायरस से पीड़ित थी नाबालिग
बिजनौर में एक 14 साल की नाबालिग के पेट से ढाई किलो बाल निकले हैं। डॉक्टरों ने नाबालिग का ऑपरेशन करके उसके पेट से बाल का गुच्छा निकाल दिया है। ऑपरेशन के बाद बच्ची अभी अस्पताल में ही भर्ती है।

उसको डॉक्टरों की टीम की निगरानी में रखा गया है। बताया जा रहा है कि बच्ची 8 साल से ट्राइकोविजार नाम की बीमारी से पीड़ित थी। इसी वजह से वो बाल खाया करती थी। इस बात की जानकारी घर में किसी को नहीं थी।

एक्स-रे में दिखाई दिया बालों का गुच्छा
बच्ची का विकास न होने और हमेशा पेट के दर्द से परेशान होने के कारण जब बच्ची का एक्स-रे करवाया गया तो उसके पेट में बालों का गुच्छा होने की बात सामने आई। जिसके बाद उसका ऑपरेशन किया गया। अभी बच्ची की हालत ठीक है।

वहीं ऑपरेशन करने के बाद डॉक्टरों का कहना है कि सही समय पर बच्ची की बीमारी सामने आ गई। अगर थोड़ी देरी हो जाती तो समस्या और बढ़ जाती। बच्ची का ऑपरेशन गुरुवार को किया गया है। बच्ची के ऑपरेशन में करीब 50 हजार का खर्चा आया है।

शरीर का विकास बिल्कुल नहीं हो रहा था
बच्ची बिजनौर शहर में सब्जी मंडी की रहने वाली है। वो कक्षा 7 की छात्रा है। बच्ची करीब 8 साल की उम्र से बाल खा रही है। बताया जा रहा है वो अपने घर वालों से छुपकर बाल खाया करती थी।

बाल खाने के कारण बच्ची का पेट बढ़ रहा था। वहीं उसके शरीर का बिल्कुल विकास नहीं हो पा रहा था। कुछ भी खाने पर बच्ची को उल्टी हो जाती थी। साथ ही उसको पेट में हमेशा दर्द बना रहता था।

ये बीमारी मानसिक रूप से पनपती है
बच्ची का ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर प्रकाश ने बताया कि एक बच्ची हमारे पास पेट दर्द की शिकायत लेकर आई थी। जब उसकी जांच कराई तो पता चला कि उसको ट्राइकोविजार नाम की बीमारी है। उसके पेट में बालों का गुच्छा है।

ये एक मानसिक बीमारी है। ये बीमारी ज्यादातर महिलाओं में होती है। बच्ची के पेट में इतना बड़ा बालों का गुच्छा होना बड़ी बात है। बाल खाने की बीमारी मानसिक रूप से पनपती है। जिसके तहत बाल खाने की आदत पड़ जाती है।

हम लोग बच्ची को पेट दर्द की दवा देते थे
इस बच्ची के परिवार का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बच्ची को अक्सर पेट में दर्द रहता था। हम लोग उसको दवा दे देते थे। मंगलवार को बच्ची को बहुत उल्टी हुई और पेट में बहुत तेज दर्द, जिसके बाद हम लोग उसको अस्पताल लेकर भागे। जहां एक्स-रे होने पर ये बात सामने आई। ऑपरेशन हो गया है, बच्ची का अब हम लोग इलाज करवाएंगे।

रॅपन्जेल सिंड्रोम से जुड़ी होती है ट्राइकोविजार बीमारी
रॅपन्जेल सिंड्रोम अक्सर ट्राइकोविजार से जुड़ा होता है। जिसे सिर के बाल तोड़ने की तीव्र इच्छा के रूप में जाना जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि बाल पेट में टूटने और पचने में मुश्किल होते हैं। वो आपके पेट की गुहा में फंस जाते हैं। लंबे समय से बालों को खाने की आदत से पेट में एक बड़ा बाल का गुच्छा बन जाता है।

रॅपन्जेल सिंड्रोम होने पर एक ही समय में अन्य मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां होने की अधिक संभावना होती है। इसमें नहीं खाने वाली चीजों को निगलने की इच्छा, सिजोफ्रेनिया, PTSD, ADHD, डिप्रेशन, एनोरेक्सिया नर्वोसा, OCD जैसे मानसिक विकार शामिल हैं। कुछ स्टडी बताते हैं कि यह सिंड्रोम उन लोगों में ज्यादा होता है, जिन्होंने बचपन में दुर्व्यवहार या उपेक्षा का अनुभव किया है।

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