बीकानेर. इंडियन सोसायटी ऑफ एनेस्थीसियोलोजिस्ट के तत्वावधान में राजस्थान स्टेट चैप्टर का दो दिवसीय कॉन्फे्रंस मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में शनिवार से शुरू हुआ। कांफ्रेंस में एनेस्थीसिया की नई तकनीकों पर मंथन किया गया। कांफ्रेंस में देशभर के 300 चिकित्सक व शोधार्थी शामिल हुए। सेमिनार का शुभारंभ इंडियन सोसायटी ऑफ एनेस्थीसियोलोजिस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. कुचेला बाबू व सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरपी अग्रवाल ने किया।
कांफ्रेंस में डॉ.कुचेलाबाबू ने बताया कि समय के साथ एनेस्थीसिया की तकनीकों में काफी बदलाव हुआ है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की भूमिका अब ऑपरेशन थियेटर में मरीजों को बेहोश करने तक ही नही रही। बल्कि ऑपरेशन के दौरान व पहले और बाद में भी मरीज के साथ विशेषज्ञ रहते हैं। ताकि मरीज की जान को कोई खतरा न हो। प्राचार्य डॉ. अग्रवाल ने कहा कि सेमिनार से मिले अनुभवों का लाभ यहां के चिकित्सकीय स्टॉफ का मिलेगा। कांफ्रेंस में डॉ. वेंकटागिरी, डॉ. सुरेश भार्गव व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. प्रदीप भाटिया ने भी विचार रखे।
जैन व चितौड़ा को लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार
कांफ्रेंस के दौरान चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले एनेस्थीसिया चिकित्सक को सम्मानित किया गया। आयोजन सचिव कांता भाटी ने बताया कि एनेस्थेसिया आइसाकोन-18 में बीकानेर की डॉ. साधना जैन और झालावाड़ के डॉ.पीएस चितौड़ा को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार एवं विशेष सम्मान डॉ. एचके गुप्ता, डॉ. एमसी दाधिच और डॉ. ओपी श्रीवास्तव को दिया गया।