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श्रमिक की प्रतिदिन की मजदूरी 600, एम्बुलेंस चालक व ईएमटी को मिल रहे 266

- 108 एम्बुलेंस कर्मचारियों में रोष - सरकार व कंपनी नहीं कर रही सुनवाई

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श्रमिक की प्रतिदिन की मजदूरी 600, एम्बुलेंस चालक व ईएमटी को मिल रहे 266

श्रमिक की प्रतिदिन की मजदूरी 600, एम्बुलेंस चालक व ईएमटी को मिल रहे 266

बीकानेर. प्रदेश में चल रही एम्बुलेंस के चालकों व ईएमटी को न्यूनतम मज़दूरी से भी कम मानदेय मिल रहा है जबकि रिस्क ज्यादा है। वाहनों की कंडीशन भी ठीक नहीं है। वहीं दूसरे राज्यों में ईएनटी व चालकों को अच्छा व सम्मानजनक मानदेय मिल रहा है। वेतन कम मिलने पर एम्बुलेंस कर्मचारी आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। वेतन बढ़ाने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही, जिससे कर्मचारियों में रोष है।

प्रदेश में जीवीके ईएमआरआई 108 एम्बुलेंस कंपनी के पास ठेका है। जिले में 108 एम्बुलेंस गाडि़यों का संचालन स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया जा रहा है। जिले में 27 एम्बुलेंस गाडि़यां संचालित हैं। इन गाडि़यों में ईएमटी एवं चालक को हर माह आठ हजार रुपए का मानदेय दिया जा रहा है जो सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से भी कम हैं। ऐसे में ईएमटी व चालकों को आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।दूसरे राज्यों में मानदेय दो से तीन गुना

108 एम्बुलेंस कर्मचारियों ने बताया कि राजस्थान में 108 कर्मचारियों को आठ हजार रुपए मानदेय दिया जा रहा है जबकि दूसरे राज्यों जैसे दिल्ली व हरियाणा में 25000 एवं 18 हजार दिया जा रहा है। राजस्थान में मानदेय बढ़ाने को लेकर कर्मचारी कंपनी प्रतिनिधियों के साथ-साथ सरकार से भी कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। वहीं दूसरी ओर जीवीके ईएमआरआई कंपनी के प्रतिनिधियों का कहना है कि कर्मचारियों को दस हजार से अधिक मानदेय दिया जा रहा है।

सुविधाएं कुछ नहीं, शोषण ज्यादा

108 एम्बुलेंस कर्मचारियों ने दबी जुबान में बताया कि ईएमटी व चालक को सुविधा के नाम पर कंपनी की ओर से कुछ नहीं दिया जा रहा है। घायल व बीमार को ले जाने पर रात के समय रहने और ठहरने की कोई सुनिश्चित व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें परेशान होना पड़ता है। कई गाडि़यों में टायर सहीं नहीं है। एम्बुलेंस में मूलभूत मेडिसिन सुविधाएं भी नहीं हैं। करीब आठ-दस गाडि़यों में एसी भी नहीं चल रहा है। ऐसे में गर्मी के दिनों में मरीजों की हालत खराब हो जाती है। जिले में पांच-छह गाडि़यां दस-दस साल पुरानी हैं। मंगलवार को एक 108 गाड़ी केस लेकर आते समय बीच रास्ते में खराब हो गई। ऐसे में मरीज को दूसरी एम्बुलेंस बुलाकर शिफ्ट करना पड़ा। तब तक प्रसूता एम्बुलेंस में तड़फती रही।

यहां-यहां है एम्बुलेंस

यातायात, नयाशहर थाना, सैटेलाइट अस्पताल, लूणकरनसर, महाजन, शेखसर, खाजूवाला, छतरगढ़, पूगल, बज्जू, गजनेर, पांचू, नापासर, जसरासर, श्रीडूंगरगढ़, मोमासर, पूनरासर, सैरुणा थाने में एक-एक एम्बुलेंस खड़ी हैं। कोलायत में तीन, नोखा व देशनोक में दो-दो एम्बुलेंस गाडि़यां खड़ी हैं।

एक नजर में ...

- जिले में 108 एम्बुलेंस 24

- क्रिटिकल केयर एम्बुलेंस 4

108 एम्बुलेंस के संचालन एवं मॉनिटरिंग का काम स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। वेतन व एम्बुलेंस गाडि़यों के रख-रखाव व अन्य सभी काम जीवीके ईएमआरआई कंपनी ही करती है। इसमें स्वास्थ्य विभाग का कोई लेना-देना नहीं हैं।

-डॉ. अबरार अहमद, सीएमएचओ

जिले में सभी गाडि़यां ऑन रोड है। कंपनी की ओर से तय मानदेय दिया जा रहा है। गाडि़यों में बंद पड़े एसी को जल्द चालू कराया जाएगा। गाडि़यों की मरम्मत का कार्य समय-समय पर करवाया जा रहा है।

-शिवसिंह जादोन, प्रोग्राम मैनेजर बीकानेर संभाग