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आजीविका शुद्धि का प्रयास करे मानव: आचार्य महाश्रमण

मोमासर में आचार्य महाश्रमण का मंगल प्रवेश  

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आजीविका शुद्धि का प्रयास करे मानव: आचार्य महाश्रमण

आजीविका शुद्धि का प्रयास करे मानव: आचार्य महाश्रमण

आजीविका शुद्धि का प्रयास करे मानव: आचार्य महाश्रमण

तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमण छापर में होने वाले चातुर्मासिक मंगल प्रवेश के लिए गतिमान है। मंगलवार को आचार्य महाश्रमण अपनी धवल सेना के साथ आडसर से मंगल विहार कर मोमासर पहुंचे। मोमासर में मंगल प्रवेश के दौरान मार्गों के दोनों और खड़े श्रद्धालुओं ने आचार्य का अभिनंदन-वंदन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान जयघोष गूंजते रहे। श्रावक समाज सहित अन्य धर्म व समाज के लोगों ने भी आचार्य का अभिनंदन-वंदन किया।

मंगल प्रवचन में आचार्य महाश्रमण ने कहा कि जहां लाभ होता है वहां लोभ और अधिक बढ़ता है। अध्यात्म की साधना में लोभ को कम करने का प्रयास किया जाता है। आदमी को अपने कषायों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आदमी के भीतर अनेक वृत्तियां होती हैं। कुछ दुर्वृत्तियां भी होती हैं तो कुछ सद्वृत्तियां भी होती हैं। माया, मोह, घृणा, लोभ, ईर्ष्या आदि दुर्वृत्तियां तो क्षमा, दया, सेवा, साधना आदि सद्वृत्तियां हैं।अधिक से अधिक धनार्जन के लिए आदमी ईमानदारी को छोड़ बेइमानी के सहारा ले लेता है, किन्तु आदमी को आजीविका में शुद्धि रखने का प्रयास करना चाहिए। इस अवसर पर मुनि धर्मरुचि, साध्वी कमलयशा, साध्वी आरोग्याश्री ने अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ महिला मण्डल व तेरापंथ कन्या मण्डल, मोमासर तेरापंथ समाज ने पृथक्-पृथक् गीत का संगान किया।स्थानीय तेरापंथ सभा के अध्यक्ष जगत संचेती, सरपंच सरिता संचेती, पदमचंद पटावरी, कानाराम, कन्हैयाल जैन पटावरी, सुरेन्द्र बोरड़, शांतिलाल पटावरी, राजेन्द्र संचेती, सुखराज सेठिया, अशोक संचेती, पुष्पा नाहटा, सुरेन्द्र सेठिया, पन्नालाल संचेती व
रूबि चोरड़िया ने अपने भावों को अभिव्यक्ति दी।