
आजादी के 10 साल बाद सिक्के पर खनका भारत, अब अमृतकाल में इंडिया पर मंथन
दिनेश कुमार स्वामी
बीकानेर. देश भले ही 1947 में आजाद हो गया और देश को इंडिया और भारत नाम से दुनियाभर में पहचाना जाने लगा। परन्तु आजादी के दस साल बाद भारतीय मुद्रा पर इंडिया के साथ भारत शब्द उकेरा गया। सिक्के पर अंग्रेजी नाम इंडिया के साथ प्राचीन नाम भारत की खनक दस साल बाद 1957 में सुनाई देने लगी। परन्तु जेब और हाथ में आए एक रुपए के भारतीय नोट पर पहली बार 1966 में हिन्दी में भारत शब्द छापा गया।
इससे पहले नोट और सिक्के पर गर्वमेंट ऑफ इंडिया ही लिखा जाता था। अब आजादी के 75 साल बाद अमृतकाल में राष्ट्रपति की ओर से जी-20 के निमंत्रण पत्र पर Ò दी प्रेजीडेंट ऑफ भारतÓ The President of Bharat लिखने से जनता में देश के नाम इंडिया और भारत को लेकर मंगलवार को मंथन शुरू हो गया।
पत्रिका ने नोटों और डाक टिकट संग्रह करने वाले भारत भूषण गुप्ता के पुराने संग्रह को खंगाला। गुप्ता ने दिखाया कि 1957 से पहले आना और पाई के सिक्के भारत सरकार ने गर्वमेंट ऑफ इंडिया लिखकर जारी किए गए थे। दशमलव प्रणाली चलन में आने पर 1957 में पहली बार नया पैसा समेत जो भी सिक्के भारत सरकार ने बनाए उन पर हिन्दी में भारत और अंग्रेजी में इंडिया उकेरा गया।
वर्ष 1965 से पहले तक भारत सरकार की ओर से एक रुपए के नोट पर गर्वमेंट ऑफ इंडिया ही छपा होता था। पहली बार 1966 में चलन में आए एक रुपए नोट पर गर्वमेंट ऑफ इंडिया के साथ भारत शब्द भी छापा गया। डाक टिकटों पर वर्ष 1962 तक केवल अंग्रेजी में इंडिया शब्द ही छपा होता था। पहली बार 14 नवम्बर 1962 को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जन्म दिन पर जारी की गई 15 पैसे की डाक टिकट पर इंडिया के साथ हिन्दी में भारत भी छापा गया। जबकि 20 मार्च 1967 से जारी शासकीय टिकट पर भारत नाम भी छापा गया।
अंग्रेजी में इंडिया, हिन्दी में भारत
आजादी के बाद देश में चलन में आए भारत सरकार के सिक्कों, नोट, डाक टिकट और सरकारी कार्यालयों में काम आने वाली शासकीय टिकट आदि पर इंडिया गर्वमेंट अंग्रेजी में छापा और उकेरा जाता रहा। भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। इसके आर्टिकल 1 में लिखा है, 'इंडिया दैट इज भारत' India that is Bharat यूनियन ऑफ स्टेट्स. यानि इंडिया जो भारत है। संविधान छूट देता है कि सरकार को 'गवर्नमेंट ऑफ इंडिया' भी कहा या लिखा जा सकता है और गवर्नमेंट ऑफ भारत यानि भारत सरकार' भी। ऐसे में 1957 में सिक्कों पर 1962 में डाक टिकट और 1966 में नोट पर हिन्दी में लोगों को भारत शब्द पढ़ने और देखने का मिला।-भारत भूषण गुप्ता, नोट, सिक्के व डाक टिकट संग्रहकर्ता
Published on:
06 Sept 2023 06:22 pm
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