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अखिल भारतीय मांड समारोह में कलाकारों ने बांधा समां

कलाकार ने सूफियाना कलाम 'छाप तिलक सब छीनी रे मौसे नैना मिलाय के' सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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All India Mand Festival

'बालमजी म्हारा झिरमिर बरसे मेह...आप बसो परदेश। शुक्रवार को हंशा गेस्ट हाउस ऑडिटोरियम में बाड़मेर के अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोक गायक समुन्द्र खान मांगणियार ने राजस्थानी गीत की स्वर लहरियां छेड़ी तो श्रोताओं ने जमकर दाद दी। कलाकार ने सूफियाना कलाम 'छाप तिलक सब छीनी रे मौसे नैना मिलाय के' सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

अवसर था पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई की स्मृति में दो दिवसीय रजत जयंती अखिल भारतीय मांड समारोह का। डॉ. मुरारी शर्मा के निर्देशन में हुए कार्यक्रम में श्री संगीत भारती के कलाकारों ने मांड की शास्त्रीय सरगम प्रस्तुत की। इसके बाद पूणे (महाराष्ट्र) से आई स्नेहल गायकवाड़ ने 'बाजे रै मुरलियां बाजे रै....' भजन की मधुर प्रस्तुति दी।

कलाकार ने मराठी भाषा में निबद्ध लावणी 'दूर वाहना सजना जाऊ दया सोडा..' सुनाकर वाह-वाही लूटी। मांड गायक बनारसी बाबू ने ठेठ राजस्थानी मांड की रचनाएं सुनाई। इनके साथ मोती जोहरी, लाल मोहम्मद ने गायन में संगत की तबला संगत उस्ताद गुलाम हुसैन ने की। जोधपुर के दलपत डांगी ने 'म्हारा नैणा रा तारा', सत्तार खां एण्ड पार्टी ने रेगिस्तानी क्षेत्र की मांड सुनाई। द वॉइस इंडिया किड्स में प्रस्तुति दे चुके जस्सू खां ने 'झीना-झीना रै उड़ा गुलाल..' सुनाया तो तालियों की करतल ध्वनि से हॉल गूंज उठा।

इनको मिला सम्मान
मांड समारोह के 25 वर्षीय सफर में विभूतियों को रजत जयंती सम्मान से सम्मानित किया।
इसमें डॉ. जयचन्द्र शर्मा, पद्मश्री कोमल कोठारी, सुधा राजहंस, लोकगायक अब्दुल गनी,
सितार वादक पंडित जसकरण गोस्वामी, डूंगरमल कल्याणी, तबलानवाज उस्ताद मोहम्मद
हनीफ खां, अब्दुल वहीद कमल, जयपुर की मांड गायिका बन्नो बेगम की संगीत सेवाओं का स्मरण करते हुए रजत जयंती सम्मान अर्पित किया गया। यह सम्मान दिवंगत विभूतियों के परिजनों ने ग्रहण किया।

इनकी रही भागीदारी
कार्यक्रम में विधायक डॉ. गोपाल जोशी, अल्लाह जिलाई बाई मांड गायकी प्रशिक्षण संस्थान के प्रबन्ध निदेशक डॉ. अजीज अहमद सुलेमानी, संयोजक अशफाक कादरी, डॉ. हरबंस सिंह, डॉ. सीतााराम गोठवाल, सुलोचना गोठवाल, कामेश्वर प्रसाद सहल, मंजूर अली चंदवानी सहित अनेक नागरिकों ने शिरकत की।

संगीत की भाषा व सीमा नहीं - गायकवाड़
पुणे की शास्त्रीय गायिका स्नेहल गायकवाड़ का कहना है कि संगीत की कोई भाषा, सीमा नहीं होती। मांड समारोह में पहली बार प्रस्तुति देने बीकानेर आई गायकवाड़ ने 'राजस्थान पत्रिकाÓ से बातचीत में कहा कि भारतीय संगीत का दुनिया में कोई मुकाबला नहीं है। महज दस साल की उम्र में ही गायकवाड़ ने किराना घराने के पंडित सुधाकर मराठे से संगीत की बारीकियांसीखी। तब से अब तक लावणी, शास्त्रीय गायन और भजन गायन से जुड़ीहैं। देश के विभिन्न राज्यों में अब तक अपने गायन का परचम लहरा चुकी है।

लोक कलाओं को मिले संरक्षण- मांगणियार
अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त राजस्थानी और सूफी गायक समुन्द्र खां मांगणियार का कहना है कि आज प्रदेश में ही राजस्थानी लोक गीत, संगीत, संस्कृति को सरकार की तरफ से जितना संरक्षण मिलना चाहिए उतना नहीं मिल पा रहा है। शुक्रवार को 'राजस्थान पत्रिका' से बातचीत में उन्होंने कहा कि आज बड़े-बड़े उत्सव प्रदेश में होते हैं, लेकिन इनमें भी राजस्थान की बजाय फिल्मी दुनिया के कलाकारों को बुलाया जाता है। अब तक 73 देशों में अपनी लोक कला का जलवा बिखेर चुके समुन्द्र ने गायन की बारीकियां उस्ताद सदीक खां, उस्ताद भुंगर खां से सीखी।

टीवी एक मंच है- जस्सू खां
एन टीवी पर द वॉइस इंडिया किड्स के प्रतिभागी जस्सू खां का कहना है कि टीवी प्रतिभाओं के लिए एक मंच बन गया है। मांड समारोह में आए जस्सू खां ने 'राजस्थान पत्रिका' से बातचीत में कहा कि अपनी संस्कृति और संगीत से लगाव है। उन्होंने बताया कि रोजाना नियमित रूप से रियाज करना उनकी जीवन शैली का हिस्सा है। जस्सू खां ने राजस्थानी गायन की बारीकियां अपने मामा समुन्द्र खां से सीखी। वर्ष 2016 में द वॉइस इंडिया के टॉप 6 फाइनल में रहे जस्सू खां को जीटीवी, इंडिया टीवी, जी रिश्ते सरीखे टीवी चैनल्स की ओर से कई बार सम्मान मिल चुका है।