
पशु
रामकिशन महिया/सूडसर. केंद्र सरकार की ओर राष्ट्रीय गोकुल अन्तर्गत संजीवनी योजना के तहत प्रजनन के साथ दुधारू पशुओं की यूनिक आईडी बनाई जाएगी। केन्द्र सरकार ने पशुपालन विभाग में नई योजना शुरू की है। अब जिलेभर में पशुओं के चोरी व गुम होने पर तुरंत पता लग सकेगा। यह आईडी पशुओं के कानों पर लगाई जाएगी। इसमें 12 अंक का कोड डाला जाएगा। इसमें पशुओं की संपूर्ण जानकारी होगी। संजीवनी पशु योजना में इंफॉर्मेशन नेटवर्क फोर एनिमल प्रोडक्शन एंड हेल्थ (इनाफ ) सॉफ्टवेयर का डाटा अपलोड किया जाएगा।
पशुओं की होगी अलग पहचान
चिकित्सालय में कृत्रिम गर्भाधान और अन्य कारण से लाए गए पशुओं की जानकारी एवं गाय व भैंस की नस्ल, उम्र, रंग, मालिक का नाम आदि बातों की जानकारी फीड करने के बाद ये टैग पशुओं के कान पर लगाया जाएगा। यह टैग पशुओं की सुविधा के हिसाब से बनाया गया है।
इस आसानी से वापस बाहर निकाला भी नहीं जा सकता है। इस योजना के तहत पहचान नंबर, आधार कार्ड, पशु का टैग नंबर, मालिक का नाम व पता, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, पशु की जाति, नस्ल, लिंग, उम्र, दूध उत्पादन क्षमता व गर्भावस्था आदि जानकारी अपलोड करनी होगी।
नस्ल की शुद्धता का भी पता चलेगा
योजना के तहत गर्भधारण करने के समय गाय व भैंस वंश के मादा नस्ल की शुद्धता का भी पता चल पाएगा व गौ तस्करी पर रोक लग सकेगी। सभी पशुओं का कार्ड बनने के बाद कृत्रिम गर्भाधान करने के उपाय व शेष पशुओं की जानकारी भी आसानी से मिल सकेगी।
इसके बाद लावारिश पशुओं को गोशालाओं में छोड़ा जाएगा और मालिक द्वारा पशु को खुला छोडऩे पर मालिक का पता लगाकर उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। पशु मालिक का नाम पता होने के बाद पशु को खरीद कर ले जाते समय किसी प्रकार की परेशानी का सामना भी नहीं करना पड़ेगा।
एक क्लिक में आ जाएगी पूरी जानकारी
पशुपालन विभाग बीकानेर के संयुक्त निदेशक डॉ.अशोक विज ने बताया कि गाय व भैंस आदि का यूनिक आई कार्ड बनने के बाद पशु की पहचान कभी भी कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन कर सकता है। पशु के खरीदने व बेचने के दौरान भी उसके और उसके मालिक के बारे में जानकारी एक क्लिक करने पर सामने आ जाएगी।
ऐसे में यदि किसी क्षेत्र में बीमारी फैल रही है तो इस स्थान का पशु अन्य जिले में ले जाया जाता है तो उसकी पहचान पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी यूनिक आईडी से कर सकेंगे। यदि किसी पशु की दुर्घटना हो जाती है तो पशु के कान पर लगे टैग से पशु के मालिक का पता आसानी से चल सकेगा।
इसमें कोई भी व्यक्ति उसके मालिक को सूचना दे सकता है। इससे देश के किसी भी कोने में मालिक व पशु के बारे में पता चल सकेगा। जिले में प्रथम चरण में कृत्रिम गर्भाधान कराने वाले पशु संजीवनी आधार कार्ड बनाए जा रहे है। पशु संजीवनी आधार कार्ड एक नवंबर से बनने शुरू हो गए है।
अब तक जिले में करीब 1700 पशुओं के कार्ड बनाए जा चुके है। फिलहाल पशुपालकों में इस टैग लगाने को लेकर भ्रांतियां बनी है कि टैग लगाकर कोई ऋ ण तो नहीं लिया जा रहा है। इसमें पशुपालकों को सहयोग कर अपने पशुओं की बेहिचक टैगिंग करवानी चाहिए।
Published on:
24 Dec 2017 01:28 pm
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